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Thursday, August 18, 2022

उत्तराखंड: बर्फ के आगोश में आए पहाड़ी इलाके, आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित

देहरादून: उत्तराखंड की मौसम ने एक बार फिर अपनी करवट बदल ली है, जिसने न सिर्फ लोगों की मुसीबतें बढ़ा दी है बल्कि लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। जी हां, बीते कुछ दिनों बाद, एक बार फिर मौसम ने अपना रुख बदला है। जिसके बाद उत्तराखंड के तमाम जिलों में बर्फ की सफ़ेद चादर बिछ गयी।

दरअसल, दो दिनों से लगातार हो रही बर्फ़बारी से उत्तराखंड की पहाड़ियों का नज़ारा काफी खुशनुमा हो गया तो वहीं ये नज़ारा स्थानीय लोगों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। यही नहीं मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान आखिरकार सच साबित हुआ, जहां मैदानी क्षेत्रो में बारिश का सिलसिला लगातार जारी है तो वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी ने स्थानीय लोगों की हालात ख़राब कर दी है। जिसके बाद आपदा कंट्रोल रूम अलर्ट मोड पर आ गया है।

कुदरत ने उत्तराखंड को बर्फिस्तान बनाने का इरादा कर लिया है। राज्य के तमाम पहाड़ी इलाके बर्फ के आग़ोश में आ गए हैं। सड़कों, घरों, पेड़-पौधों पर बर्फ जमी हुई है। यही नहीं तमाम जगहों की झीलें तक जम गयी हैं। झर-झर बहते झरने जम गये हैं। इंसान ठंड से थर-थर कांप रहा है। ठंड से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं। लेकिन अलाव की ताप बर्फ और ठंड के सामने धीमी पड़ रही है। लोगों का घर से बाहर निकलना भी दुश्वार हो गया है। जहां एक ओर कुछ दिन पहले लोग बर्फबारी की दुआएं कर रहे थे। वो अभी भगवान से दुआएं कर रहे हैं कि भगवान अब बख्श दे और बर्फबारी से निज़ात दिला दो।

मौसम ने उत्तराखंड की हालत पहले ही खराब कर रखी थी लेकिन जैसे ही 48 घंटे का मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया। ये सुनते ही स्थानीय लोग तो क्या सरकारी सिस्टम को भी शिद्द्त से पड़ रही ठण्ड ने पसीने छुड़े दिए। इलाकों में बर्फबारी इतनी हुई और परेशानी इतनी बढ़ी की आपदा कंट्रोल रूम में लगे सूचना फोन की घंटिया घनघनाने लगी। कहीं सड़कें बंद तो कहीं पानी की आपूर्ति बंद तो कहीं बिजली ही गायब।

चमोली जिले के 35 गांव बर्फबारी की चपेट में आ गये हैं तो कई मोटर मार्ग लबालब बर्फ से भरे हैं। साथ ही कक्षा 01 से 12 तक के स्कूलों व आंगनबाड़ी केन्द्रों में भी छुट्टी की घोषणा कर दी गयी थी। प्रशासन की टीम अपने उपकरण के साथ रास्ते खोलने में लगी है। दावा किया जा रहा है कि सब ठीक है और अपने सरकारी लाव लश्कर के साथ तमाम क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है।

फिलहाल चमोली जिले के बद्रीनाथ, हेमकुण्ड, फूलों की घाटी, ओली, रुपकुण्ड जैसे उंचाई वाले ईलाको को बर्फबारी जारी है। तो वहीं टिहरी बर्फ से लबालब है। पिथौरागढ़ में भी लगातार पड़ रही बर्फ से हालत खराब होते जा रहे हैं। बर्फबरी के चलते जनजीवन अस्तवस्त हो गया है चारधाम यात्रा मार्गो पर बर्फ को हटाने के लिए टीम मौजूद है।

उत्तरकाशी जनपद में बारिश और जबरदस्त बर्फ़र्बारी होने से आम लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उपला टकनोर के दर्जनों गांवों में एक बार फिर से बिजली पानी का संकट पैदा हो गया हैं।

इस बार लगातार हो रही बर्फबारी के कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सबसे बड़ा ग्लेशियर चांग ठांग इस घाटी में आता है, यह दस से बारह फुट काट कर बीआरओ मार्ग खोलने की कवायद में जुटा हुआ है। पहाड़ियों पर भारी मात्रा में बर्फ जमा है। हाईवे के किनारे सात स्थान ऐसे हैं, जहां चार से छह फीट ऊंचे हिमखंड हैं। ऐसे में यहां हिमखंडों के दरकने का खतरा बना रहता है। इससे सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को भी सड़क से बर्फ हटाने में दिक्कतें आ रही हैं। जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर गंगोत्री के पास पहाड़ियों पर भारी मात्रा में जमा बर्फ खतरा बनी हुई हैं।

टीम बेबाक

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