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Sunday, December 5, 2021

हरितालिका तीज: क्यों बेहद कठिन माना जाता है ये व्रत, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व ?

Delhi: हरितालिका का व्रत गरुवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार हरितालिका तीज पर विशेष संजोग बन रहे है। इसके साथ ही रवियोग बन रहा है, मान्यता है कि इस शुभ संयोग में व्रत और पूजन करने से सुहागिनों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

बेहद कठिन माना जाता है हरितालिका तीज व्रत


ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि इस दिन सुहागिनें पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए निराहार और निर्जला व्रत रखती हैं, हरतालिका तीज को हिंदू धर्म में सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, मान्यता है कि यह व्रत अत्यंत शुभ फलदायी होता है, हरतालिका तीज को हरियाली और कजरी तीज के बाद मनाते हैं।

हरितालिका तीज पर रवियोग

आचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि हरितालिका तीज पर 14 साल बाद रवियोग चित्रा नक्षत्र के कारण बन रहा है, यह शुभ योग 9 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से अगले दिन 10 सितंबर को 12 बजक 57 मिनट तक रहेगा। हरतालिका तीज व्रत का पूजा का अति शुभ समय शाम 05 बजकर 16 मिनट से शाम को 06 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। शुभ समय 06 बजकर 45 मिनट से 08 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।

हरतालिका तीज महत्व

आचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि हरतालिका तीज व्रत करने से पति को लंबी आयु प्राप्त होती है, मान्यता है कि इस व्रत को करने से सुयोग्य वर की भी प्राप्ति होती है, संतान सुख भी इस व्रत के प्रभाव से मिलता है।

हरितालिका तीज पूजा विधि

  • हरितालिका तीज में श्रीगणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
  • सबसे पहले मिट्टी से तीनों की प्रतिमा बनाएं और भगवान गणेश जी को तिलक करके दूर्वा अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान शिव को फूल, बेलपत्र और शमिपत्री अर्पित करें और माता पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
  • तीनों देवताओं को वस्त्र अर्पित करने के बाद हरितालिका तीज व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  • इसके बाद श्रीगणेश की आरती करें और भगवान शिव और माता पार्वती की आरती उतारने के बाद भोग लगाएं…..!!

टीम बेबाक…

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