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Sunday, December 5, 2021

भागवत महापुराण में लिखी ये 11 बातें कलयुग में हो रही हैं सच

  1. श्रीशुकदेवजी परीक्षित से कहते हैं राजन! समय बड़ा बलवान् है; ज्यों-ज्यों घोर कलियुग आता जायगा, त्यों-त्यों धर्म, सत्य, पवित्रता, क्षमा, दया, आयु, बल और स्मरणशक्ति का लोप होता जायगा।
    “ततश् चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया।
    कालेन बलिना राजन् नङ्‌क्ष्यत्यायुर् बलं स्मृतिः॥”
  2. कलयुग में वही व्यक्ति गुणी, सदाचारी माना जायेगा जिसके पास अधिक धन है। जिसके हाथ में शक्ति होगी वही धर्म और न्याय की व्यवस्था अपने अनुकूल करा सकेगा।
    “वित्तमेव कलौ नॄणां जन्माचारगुणोदयः।
    धर्म न्याय व्यवस्थायां कारणं बलमेव हि॥”
  3. कलयुग में स्त्री-पुरुष बिना विवाह के केवल रूचि के अनुसार ही रहेंगे। व्यापार की सफलता का आधार छल होगा। ब्राह्मण की पहचान केवल जनेऊ से होगी।
    “दाम्पत्येऽभिरुचि र्हेतुः मायैव व्यावहारिके।
    स्त्रीत्वे पुंस्त्वे च हि रतिः विप्रत्वे सूत्रमेव हि॥”
  4. किसी व्यक्ति के धार्मिक होने की पहचान उसका बाहरी पहनावा होगा और उसी को बदल कर वह एक धर्म से दूसरे में प्रवेश कर लेगा। गरीब, असमर्थ को न्याय नहीं मिलेगा। जो बोलचाल में जितना चतुर होगा, उसे उतना ही बड़ा पण्डित माना जायगा।
    “लिङ्‌गं एवाश्रमख्यातौ अन्योन्यापत्ति कारणम्।
    अवृत्त्या न्यायदौर्बल्यं पाण्डित्ये चापलं वचः ॥”
  5. कलयुग में लोग नाना प्रकार की चिन्ताओं और रोगों से ग्रसित रहेंगे।
    “क्षुत्तृड्भ्यां व्याधिभिश् चैव संतप्स्यन्ते च चिन्तया।”
  6. कलयुग में मनुष्यों की परमायु त्रिंश-30+द्विंशति-20= 50 साल की रह जाएगी।
    “त्रिंशद्विंशति वर्षाणि परमायुः कलौ नृणाम।”
  7. लोग दूर के नदी-तालाबों को तीर्थ मानेंगे और सिर पर कई प्रकार से केश रखना सौन्दर्य का चिन्ह समझा जायगा । जीवन का सबसे बड़ा पुरुषार्थ होगा अपना पेट भर लेना।
    “दूरे वार्ययनं तीर्थं लावण्यं केशधारणम् ।
    उदरंभरता स्वार्थः सत्यत्वे धार्ष्ट्यमेव हि ॥”
  8. कभी बारिश नहीं होगी, सूखा पड़ेगा। कभी कड़ाके की सर्दी पड़ेगी तो कभी असहनीय गर्मी। कभी आँधी चलेगी, तो कभी बाढ़ आ जायगी। इन उत्पातों से तथा आपस के संघर्ष से प्रजा अत्यन्त पीड़ित होगी।
    “अनावृष्ट्या विनङ्‌क्ष्यन्ति दुर्भिक्षकर पीडिताः।
    शीतवातातपप्रावृड् हिमैरन्योन्यतः प्रजाः॥”
  9. कलयुग में जो व्यक्ति गरीब होगा लोग उसे साधू नहीं मानेंगे। जो जितना अधिक दम्भ-पाखण्ड कर सकेगा, उसे उतना ही बड़ा साधु समझा जायगा। विवाह के नाम पे सिर्फ समझौता होगा और लोग स्नान को ही शरीर का शुद्धिकरण समझेंगे।
    “अनाढ्यतैव असाधुत्वे साधुत्वे दंभ एव तु।
    स्वीकार एव चोद्वाहे स्नानमेव प्रसाधनम्॥”
  10. कुटुंब को पाल लेना ही दक्षता मानी जायगी। लोग सिर्फ दूसरो के सामने यश के लिय, अच्छा दिखने के लिए धर्म-कर्म के काम करेंगे। कलयुग में दिखावा बहुत होगा और पृथ्वी पर भ्रष्ट और दुष्ट लोग भारी मात्रा में होंगे। लोग सत्ता या शक्ति हासिल करने के लिए किसी को मारने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
    “दाक्ष्यं कुटुंबभरणं यशोऽर्थे धर्म सेवनम्।
    एवं प्रजाभिर्दुष्टाभिः आकीर्णे क्षितिमण्डले॥”
  11. पृथ्वी के लोग सूखे की वजह से घर छोड़ पहाड़ों पे रहने के लिए मजबूर हो जायेंगे। लोग पत्ते, फूल, कंद मूल और जंगली शहद जैसी चीज़ें खाने को मजबूर होंगे।
    “आच्छिन्नदारद्रविणा यास्यन्ति गिरिकाननम्।
    शाक मूलामिषक्षौद्र फल पुष्पाष्टिभोजनाः ॥”

टीम बेबाक

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