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Wednesday, October 20, 2021

यूपी की सियासत पर ‘प्रियंका गांधी’ का बढ़ता कद, अर्से बाद यूपी में एक सशक्त विपक्ष बनकर उभरी कांग्रेस

10 माह से अधिक दिनों से जारी किसान आंदोलन की खबरें भी अब यूपी के लखीमपुर खीरी कांड के आगे फीकी पड़ गई हैं। 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में घटित इस घटना के बाद सिर्फ यूपी नहीं बल्कि देश की राजनीति को भी हिलाकर रख दिया है। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक जहां देखो इसी कांड पर चर्चा हो रही है। इस कांड के बहाने विपक्ष ने योगी सरकार पर एक साथ चढ़ाई कर दी है। वहीं इस पूरे मामले में प्रियंका गांधी ने डटकर सरकार की घेरा बंदी की हैं।

New Delhi: पूर्व में तीन दिनों में जो तीन वीडियो वॉयरल हुए हैं, उसमें प्रियंका गांधी सीधे तौर पर योगी सरकार से टकराती हुई दिखाई दे रही हैं। इन वीडियो को पूरे देश ने देखा और सुना है। सुनकर ये महसूस भी किया कि जिस साहस व धैर्य के साथ प्रियंका गांधी ने मृत किसानों की पीड़ा को रखा है, उससे न सिर्फ पीड़ित परिवार को भावात्मक रूप से बल मिला है बल्कि यूपी सरकार को आरोपियों पर कार्रवाई के लिए मजबूर भी होना पड़ा है। साथ ही देशभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। तीन दिनों तक सीतापुर पुलिस ने भले ही प्रियंका को अपनी कैद में रखा था, भले ही उन्हे लखीमपुर खीरी नहीं जाने दिया गया हो लेकिन न ही योगी सरकार और न ही यूपी पुलिस प्रियंका के हौसले को तोड़ने में कामयाब नहीं हुए। हिरासत में जाने के बाद मानों प्रियंका की ताकत और कई गुना बढ़ गई हो। अस्थाई जेल में रहने के बाद प्रियंका के जो तेवर देश ने सुने उससे यही कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रियंका की ये लड़ाई बस यहीं नहीं थमने वाली। यूपी की सियासत में प्रियंका के इन तेवरों का बहुत गहरा असर पड़ने वाला है और इसकी बानगी प्रियंका कई मौकों पर दिखा भी चुकी हैं। पिछले दिनों एक बार फिर से देश ने प्रियंका गांधी पर इंदिरा की छवि देखी है। वहीं प्रियंका के इस मास्टर स्ट्रोक के बाद यूपी सरकार बैकफुट पर है।

लखीमपुर कांड को कैसे प्रियंका ने किया हाईजैक

घटना के बाद तीन अक्टूर को प्रियंका गांधी शाम को तुरंत लखीमपुर खीरी जाने के लिए निकलीं। जहां उन्हे यूपी पुलिस ने चार अक्टूबर की होने वाली सुबह के पहले ही सीतापुर पुलिस लाइन में ही रोक लिया। इस बीच प्रियंका गांधी और यूपी पुलिस के बीच होने वाली नोंक-झोंक का वीडियो भी खूब वॉयरल हुआ। इसके बाद प्रियंका को हिरासत में ले लिया गया। लेकिन प्रियंका कैद में होने के बाद भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात को देश के सामने रख रहीं थी। योगी और मोदी सरकार पर जमकर निशाना साध रहीं थी। वहीं गांधीवादी तरीके से उन्होंने लोगों को खूब प्रभावित भी किया। फिर चाहे वे कैद किए गए कमरे में झाडू लगाने का वीडियो हो। या फिर लखीमपुर खीरी कांड में मृत किसानों की पीड़ा के माध्यम से पीएम मोदी के अमृत महोत्सव पर निशाना साधना हो। प्रियंका की सक्रियता को देखते हुए सपा और किसान नेता टिकैत से ज्यादा देश की नजरे प्रियंका पर टिक गईं थी।

क्या 2022 में प्रियंका की ये मेहनत रंग ला पाएगी

हालांकि यूपी की बागडोर संभालते ही प्रियंका ने सशक्त विपक्ष की भूमिका दिखाई है। हर मुद्दे पर जनता के लिए आवाज उठाती रहीं हैं। चाहे लखीमपुर खीरी हो या हाथरस कांड जिस प्रकार से प्रिंयका इन मौकों पर योगी सरकार को घेरती दिखीं उससे ये साफ है कि देश को मौजूदा दौर में जब भी एक सशक्त विपक्ष की जरूरत पड़ेगी तो कांग्रेस से बेहतर अभी कोई दूसरा विकल्प नहीं है। तो ऐसे में अब ये देखना होगा कि प्रियंका गांधी की ये मेहनत यूपी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में क्या रंग ला पाएगी। यदि यूपी में अभी कांग्रेस की स्थिति देखें तो बसपा के बाद कांग्रेस चौथे नंबर पर है। इस स्थिति में कांग्रेस कितना सुधार कर पाती है ये देखाना जरूरी होगा।

आखिर 4 अक्टूबर से क्या है गांधी परिवार का कनेक्शन

प्रियंका गांधी अजय सिंह लल्लू के नेतृत्व में यूपी में अपना वजूद खो चुकी कांग्रेस के लिए नई जमीन तैयार करने की कोशिश में जुटी हुईं हैं। पर जब चार अक्टूबर और गांधी परिवार के इतिहास पर नजर डालते हैं तो पता चलता है कि चार अक्टूबर, साल 1977 में देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के 16 घंटे के बाद उन्हें रिहा कर किया गया था। उस समय देश में पीएम मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार थी। चुनाव प्रचार के दौरान इस्तेमाल की गई जीपों की खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार इंदिरा गांधी को सुबूत न होने के कारण 16 घंटे बाद ही अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया।

(बेबाक न्यूज के लिए तरुण चतुर्वेदी की रिपोर्ट)

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