28.1 C
New Delhi
Thursday, August 18, 2022

सुप्रीम कोर्ट ने BCCI अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को किया बर्खास्त

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को बड़ा झटका देते हुए बोर्ड अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को पद से हटा दिया है। बीसीसीआई में सुधारों पर पिछले डेढ़ साल से सुनवाई चल रही है। इसके साथ कोर्ट ने कहा कि बोर्ड के वह सभी पदाधिकारी जो लोढा पैनल की सिफारिशें मानने से मना करते हैं, उन्हें भी जाना होगा। कोर्ट ने ये भी कहा कि बीसीसीआई और राज्य बोर्ड के अधिकारी क्रिकेट बॉडी में जिम्मेदारी और पारदर्शिता लाने के आदेश पर अमल करने में असफल रहे। अब ठाकुर और शिर्के को हटाए जाने के बाद बोर्ड के सबसे सीनियर उपाध्यक्ष अध्यक्ष का पद संभालेंगे और संयुक्त सचिव, सचिव के रूप में कार्य करेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई है। जानिए क्या है पूरा मामला और किन वजहों से अनुराग ठाकुर और अजय शिर्के को बीसीसीआई से बेदखल किया गया….

अनुराग पर चलेगा अवमानना का मुकदमा
बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को हटाए जाने के पीछे की एक मुख्य वजह ये भी रही कि ठाकुर लगातार कोर्ट की अवमानना कर रहे थे। वहीं सचिव अजय शिर्के ने भी कुछ ऐसा ही रुख अपनाया था। जिसके बाद अब अनुराग ठाकुर पर अवमानना का केस भी चलाया जाएगा। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को झूठी गवाही देने के लिए फटकार लगाई थी। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था कि अनुराग ठाकुर पर अवमानना का केस चलाया जा सकता है, अगर बिना शर्त माफी नहीं मांगी तो उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है। अनुराग पर आरोप है कि उन्होंने कोर्ट से झूठ बोला था कि सुधार प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने की कोशिश की. हालांकि अनुराग ने इन आरोपों से इनकार किया है। दरअसल इन दोनों पर ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बीसीसीआई में सुधार को लेकर लोढा पैनल की सिफारिशों के लागू कराने की जिम्मेदारी थी। लेकिन इन्होंने राज्य क्रिकेट संघों का हवाला देकर सुधारों का लागू नहीं किया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए कई बार फटकार भी लगाई थी।

सुधर जाओ नहीं तो हम सुधार देंगे- SC
यहां तक की सुप्रीम कोर्ट ने तो यह भी कहा था कि ‘सुधर जाओं नहीं तो हम अपने आदेश से सुधार देंगे।’ फिर भी ठाकुर और शिर्के ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और बहाने बनाते रहे। इस पर लोढा पैनल ने सुप्रीम कोर्ट में बोर्ड के शीर्ष पदाधिकारियों को हटाए जाने की मांग रख दी और कई सुनवाई के बाद भी जब बीसीसीआई लगातार उसके निर्देशों की अवहेलना करता रहा तो उसने अनुराग ठाकुर और अजय शिर्के को हटाने का फैसला सुना दिया।

कब हुई थी शुरुआत
* दरअसल, साल 2013 में आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग और मैच फिक्सिंग के मामले ने जोर पकड़ा उसके बाद ही बीसीसीआई के लिए मुश्किलों का दौर में शुरू हुआ।
* दिल्ली पुलिस ने आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल के तीन खिलाड़ियों को गिरफ्तार किया। इन पर मैच के दौरान स्पॉट फ़िक्सिंग में लिप्त होने का आरोप था।
* इसके कुछ ही दिन बाद उस समय के बीसीसीआई प्रमुख एन श्रीनिवासन के दामाद और उनकी आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स के सीईओ गुरुनाथ मयप्पन और अभिनेता बिंदु दारा सिंह भी हिरासत में ले लिए गए।
* इस मामले ने तूल पकड़ा और वह सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इसकी जांच के लिए जस्टिस मुकुल मुद्गल के अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी, जिसने साल 2014 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।
* मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई में सुधारों की जरुरत महसूस करते हुए कुछ सख्त निर्देश दिए और इसके लिए जनवरी, 2015 को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व प्रधान न्यायाधीश जस्टिस आरएम लोढा के नेतृत्व में तीन सदस्यों की कमेटी गठित कर दी।
* उसके बाद जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने 4 जनवरी, 2016 को बीसीसीआई में सुधारों के लिए कई् अहम सिफारिशें रखीं। बीसीसीआई ने इनमें से कई सिफारिशों पर तो हां कह दिया, लेकिन कुछ को लेकर अड़ियल रुख अपना लिया।
* उसके बाद से इस पर कई दौर की सुनवाई हो चुकी थी और बीसीसीआई अपने रुख से डिगने को तैयार नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने उसे कई बार चेतावनी भी दी, लेकिन बोर्ड अपनी समस्याओं का रोना रोता रहा।

लोढा पैनल की क्या थी सिफारिशें?
* लोढा पैनल ने यह सिफारिश की थी कि बीसीसीआई की 14 सदस्यों वाली कार्यकारिणी कमेटी की जगह 9 सदस्यों वाली शीर्ष परिषद बनाई जाए।
* एक अहम सिफारिश यह थी कि 70 साल से अधिक की उम्र का कोई भी व्यक्ति बीसीसीआई या राज्य बोर्ड की किसी भी कमेटी का सदस्य न बने।
* पैनल ने कहा था कि किसी भी राज्य में सिर्फ एक ही संघ होना चाहिए और एक राज्य सिर्फ एक वोट कर सकता है। अगर एक राज्य में एक से ज्यादा क्रिकेट संघ है तो वह रोटेशन के तहत वोट दें।
* बीसीसीआई की कार्यकारिणी कमेटी में कोई भी मंत्री या सरकारी अधिकारी न हो। टीम चयन के लिए पांच सदस्यों की जगह तीन सदस्य वाली चयन समिति बने।
* पैनल ने कहा कि एक पदाधिकारी एक बार में केवल तीन साल के लिए ही बीसीसीआई की कार्यकारिणी का सदस्य रहे और ज्यादा से ज्यादा तीन बार बीसीसीआई का चुनाव लड़े। लगातार दो बार कोई भी पदाधिकारी किसी भी पद पर नहीं रह सकता।
* आईपीएल और बीसीसीआई की अलग-अलग संचालन संस्था हो। आईपीएल और राष्ट्रीय कैलेंडर के बीच 15 दिन का अंतर होना चाहिए यानी आईपीएल ख़त्म होने के 15 दिन के बाद खिलाड़ी कोई भी अंतर्राष्ट्रीय मैच खेल सकता है।
* लोढा पैनल ने सट्टेबाज़ी को वैध करने की सिफारिश की थी, लेकिन यह भी कहा था कि कोई खिलाड़ी, प्रबंधक और पदाधिकारी सट्टेबाज़ी का हिस्सा न हो। पैनल ने यह भी सिफारिश की कि मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग को अपराध माना जाए।
* एक सदस्य सिर्फ एक पद पर रहे चाहे वह राज्य क्रिकेट बोर्ड के किसी समिति का हो या बीसीसीआई की मूल समिति का।
* बीसीसीआई को आरटीआई एक्ट के दायरे में लाया जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे संसद का मामला बताया था और इसे नहीं माना।
* खिलाड़ियों के हित के लिए एक संघ बनाए जाए और उसकी फंडिंग बीसीसीआई करे।

टीम बेबाक

SHARE

Bebak Newshttp://bebaknews.in
Bebak News is a digital media platform. Here, information about the country and abroad is published as well as news on religious and social subjects.

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

114,247FansLike
138FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles

SHARE