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Monday, June 27, 2022

Shri Surya kavach: श्री सूर्य-कवच (आरोग्य एवं विजय प्राप्त्यर्थ), हिन्दी अनुवाद सहित

अथ् विनियोग

ॐ अस्य श्री सूर्य-कवचस्य ब्रह्मा ऋषि:, अनुष्टप् छन्दः , श्री सूर्यो देवता:। आरोग्य च विजय प्राप्त्यर्थं, अहम् , पुत्रों श्री, पौत्रों श्री…. गोत्रे…. जन्मौ…. श्रीसूर्य-कवच-पाठे विनियोगः।

अर्थ एवं विधान

(अपने शुद्ध दाएँ हाथ में आचमनी में जल भरकर लें, बाएँ हाथ से दायीं भुजा को स्पर्श करते हुए निम्न प्रकार से विनियोग करें)

“इस श्री सूर्य कवच के ऋषि ब्रह्मा हैं, छन्द अनुष्टुप् है एवं श्री सूर्य देवता हैं। आरोग्य एवम् विजय की प्राप्ति हेतु मैं……. पुत्र श्री….. पौत्र श्री…… गोत्र में जन्मा हुआ। श्री सूर्य…..कवच के पाठ के निमित्त स्वयं को नियोजित करता हूँ “

ऐसा कहकर आचमनी के जल को हाथ को सीधा अर्थात् ऊपर की ओर रखते हुए ही तीन बार थोड़ा-थोड़ा करके पृथ्वी पर छोड़ दें । उसके बाद निम्नलिखित श्री सूर्य कवच का अपने अभीष्ट अंगों को स्पर्श करते हुए जाप करें।

अथ् श्री सूर्य-कवचं :

प्रणवो मे शिरं पातु , घृणि: मे पातु भालकं ।।
सूर्योsव्यान नयनद्वन्दम् , आदित्य कर्णयुग्मकं ।।

अर्थ : मैं प्रणव को अपने शिर, घृणि को मस्तक, अव्यय सूर्य को दोनों नेत्रों एवम् आदित्य को दोनों कानों में धारण (प्रतिष्ठित) करता हूँ ।

ह्रीं बीजम् मे मुखम् पातु , हृदयम् भुवनेश्वरी ।।
चंद्रबिम्बं विंशदाद्यम् पातु मे गुह्यदेशकम् ।।
शीर्षादि पादपर्यन्तम् सदा पातु वैवस्वतमनुत्तमः।।

अर्थ : मेरे मुख में ह्रीं बीज , हृदय में भुवनेश्वरी , कँ खँ गँ घँ चँ छँ जँ झँ टँ ठँ डँ ढँ तँ थँ दँ धँ पँ फँ बँ भँ आदि मेरे गुह्यदेश में ~ और शिर से पैरों तक मनुश्रेष्ठ श्री वैवस्वत जी सदैव विराजमान रहें ।

शुद्ध सूती अथवा ऊनी आसन पर पूर्वाभिमुख होकर ~प्रातःकाल इस कवच का प्रतिदिन कम से कम एक बार जाप अवश्य करना चाहिए ।

।।ॐ नमामिःश्रीकृष्णादित्त्याय,परात्परब्रह्मणे च सद्गुरुदेवाय।।

टीम बेबाक

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