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Sunday, January 16, 2022

विपक्ष के हंगामे के बीच कर्नाटक विधानसभा में धर्मांतरण रोकथाम बिल पेश

Bengaluru: कर्नाटक की बीजेपी सरकार ने मंगलवार दोपहर को सप्पलेमेंट्री एजेंडा के ज़रिए धर्मांतरण रोकथाम बिल यानी कर्नाटका प्रोटेक्शन ऑफ राइट टू फ्रीडम ऑफ रैलीजन बिल 2021 को विधानसभा में पेश किया। बेलगावी में चल रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में राज्य के गृह मंत्री ऐ. ज्ञानेन्द्रा ने बिल को पेश किया।

कांग्रेस के नेता और पूर्व पुखिमंत्री सिध्दरामैया ने इस पर आपत्ति दर्ज की और कहा कि सरकार की नीयत साफ नहीं है इसीलिए गलत तरीके से इसे पेश किया गया। स्पीकर विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने इसके जवाब में कहा कि कल रात तक बिल की कॉपी प्रिंट नहीं हुई थी। सुबह प्रिंट होकर आ गयी इसीलिए एजेंडा में इसे बाद में जोड़ा गया, इस बिल पर कल यानी बुधवार को विधानसभा में बहस होगी। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सदन से वाकआउट किया।

कर्नाटक धार्मिक सरंक्षण अधिकार बिल 2021 की ख़ास बातें

धर्मांतरण के लिए किसी भी तरह के प्रलोभन-चाहे वो उपहार के रूप में हो या आर्थिक मदद के तौर पर या फिर किसी और रूप में, इसकी अनुमति नहीं होगी

धर्मिक संस्थान की और से उनके शैक्षिणिक संस्थानों में नौकरी या मुफ्त शिक्षा का प्रलोभन

किसी और धर्म के खिलाफ दूसरे धर्म का महिमा मंडन करना

शादी करवाने का वादा या फिर बेहतर जीवन या दैवीय मदद का भरोसा

सजा का प्रावधान

जनरल केटेगरी वाले शख्स का धर्मान्तरण कराने वाले आरोपी को 3 से 5 साल तक की सज़ा दी जा सकती है ,साथ में कम से कम 25 हज़ार का जुर्माने का प्रावधान SC /ST, नाबालिग, महिला और मानसिक रूप से कमजोर शख्स का धर्मांतरण कराने वाले आरोपी को 3 साल से 10 साल तक की सज़ा ,साथ ही कम से कम 50 हज़ार जुर्माना।

सामूहिक धर्मांतरण के आरोपियों को 3 से 10 साल तक की सज़ा और 1 लाख रुपये जुर्माना।

धर्मांतरण के आरोप साबित होने पर दोषी की ओर से पीड़ित को 5 लाख रुपए तक बतौर मुवावज़ा देने का प्रावधान भी इस बिल में है। अगर शादी सिर्फ धर्मांतरण के लिए की गई होगी तो उस शादी को रद्द करने का प्रावधान है।

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