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Saturday, November 26, 2022

पंजाब में बिजली कटौती पर सियासत, पुराने एग्रीमेंट को रद्द करने की तैयारी में सरकार

Punjab: पंजाब में बिजली कटौती पर सियासत थमने का नाम नहीं ले रहा है। जहां सरकार एक तरफ पुराने एग्रीमेंट को रद्द करने की तैयारी में है। वहीं पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है और पूछ रहा है कि साढे़ 4 साल में पंजाब सरकार ने बिजली की क्षमता को बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए। वहीं, कांग्रेस के अपने नेता भी मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं।

अकाली भाजपा सरकार में हुए एग्रीमेंट को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री ने सीधे-सीधे आरोप भाजपा और शिरोमणि अकाली दल की पिछली सरकार पर लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार ने जो एग्रीमेंट किए थे, उसी की वजह से पंजाब में यह बिजली संकट के हालात पैदा हुए हैं।

वहीं, अकाली नेता चरणजीत बराड़ का कहना है कि साढ़े 4 साल तक सरकार को बिजली के एग्रीमेंट की चिंता नहीं हुई लेकिन अब चुनाव सिर पर है तो उन्हें बिजली की चिंता हो रही है।

उन्होंने कहा कि अगर भाजपा अकाली सरकार ने जो एग्रीमेंट किए थे, उसमें कुछ गलत है तो उसको रद्द कर देते और नए एग्रीमेंट करते लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। अब जब चुनावी साल है तो एग्रीमेंट पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके खुद के नेता सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान का कहना है कि आम आदमी पार्टी ने जब बिजली के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया, तब जाकर सरकार की नींद टूटी। उन्होंने कहा कि 2017 के चुनावी वायदे में सरकार ने कहा था कि यह एग्रीमेंट कैंसिल करेगी लेकिन अभी तक नहीं किए।

उन्होंने कहा कि जब से अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में 300 यूनिटी फ्री देने का ऐलान किया है, तब से कांग्रेस की नींद उड़ी हुई है और अब खुद उनके नेता कह रहे हैं कि राज्य में 300 यूनिट फ्री बिजली देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि वह दिल्ली के मॉडल को मानते हैं।

वहीं, कांग्रेस के प्रवक्ता और विधायक राजकुमार वेरका का कहना है कि अकाली भाजपा ने जो एग्रीमेंट किए थे। इसी की बदौलत आज पंजाब को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया हुआ है लेकिन फिर भी हम इन समझौतों को रद्द कर रहे हैं और पंजाब की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं।

पंजाब में गर्मी से बचने के लिए लगभग 1500 मेगावाट बिजली का अतिरिक्त उत्पादन करना होगा। इस साल बिजली की डिमांड 14, 500 मेगावाट तक पहुंच गई है। जबकि पंजाब के पास जेनरेशन कैपेसिटी 13, 474 मेगावाट है। इस तरह 1026 मेगावाट की सीधी कमी है। इसी तलवंडी सबों थर्मल प्लांट में खराबी आने से 600 मेगावाट की कमी और हो गई है।

टीम बेबाक

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