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Saturday, May 28, 2022

NFHS रिपोर्ट: देश में फर्टिलिटी रेट में आई कमी, 30 फीसदी महिलाएं हिंसा की शिकार

New Delhi: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस रिपोर्ट की मानें तो देश में बच्चे पैदा करने की रफ्तार कम हुई है। पहले यह दर 2.2 फीसदी थी, जो अब महज 2 फीसदी रह गई है।

National Family Health Survey के रिपोर्ट के मुताबिक, सभी धर्मों में पहले की तुलना में बच्चे कम पैदा हो रहे हैं। वहीं, देश में बेटियों को लेकर धीरे-धीरे लोगों की सोच बदल रही है। देश में दो बेटियों वाली 65 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें बेटे की कोई ख्वाहिश नहीं है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 की ताजा रिपोर्ट में यह बात निकलकर आई है।

2015-16 में किए गए चौथे नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) और पांचवें 2019 – 21, इस सप्ताह की शुरुआत में जारी आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि उच्च प्रजनन दर वाले समूहों में तेजी से गिरावट देखी जा रही है।

इस प्रकार, मुसलमानों में NFHS-4 और NFHS-5 के बीच 2.62 से 2.36 तक 9.9% की सबसे तेज गिरावट देखी गई है। यह अन्य समुदायों की तुलना में अधिक है। 1992-93 में सर्वेक्षणों की शुरुआत के बाद से, भारत में TFR कुल प्रजनन दर 3.4 से 40% से अधिक गिरकर 2.0 हो गया है। साथ ही यह उस लेवल पर पहुंच गया है, जो जनसंख्या आंकड़े को स्थिर रखे।

TFR में हुआ तेजी से गिरावट

NFHS के हालिया सर्वेज्ञण से पता चलता है कि मुसलमानों के अलावा अन्य सभी प्रमुख धार्मिक समूहों ने अब प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Rate) से नीचे का टोटल फर्टिलिटी रेट हासिल कर लिया है। वहीं, सर्वे के प्रत्येक चरण में तेजी से गिरावट के बावजूद मुस्लिमों के बीच यह रेट थोड़ा अधिक है। NHFS के अब तक के पांच सर्वे में मुस्लिम टीएफआर (Total Fertility Rate) में 46.5 फीसदी की गिरावट आई है, हिंदुओं में 41.2 फीसदी और ईसाइयों और सिखों के लिए लगभग एक तिहाई की गिरावट आई है।

एक ही समुदाय के लिए टीएफआर राज्यों के हिसाब से अलग है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में हिंदुओं का टीएफआर 2.29 है, लेकिन तमिलनाडु में उसी समुदाय का टीएफआर 1.75 है, जो प्रतिस्थापन दर से काफी कम है। इसी तरह, यूपी में मुस्लिम टीएफआर 2.66 है, लेकिन तमिलनाडु में यह 1.93 है, जो फिर से प्रतिस्थापन दर से नीचे है।

गर्भनिरोधक को लेकर पुरुषों की ये है सोच

सर्वे में 35% पुरुषों का मानना है कि गर्भनिरोधक अपनाना महिलाओं का काम है। वहीं, 19.6% पुरुषों का मानना है कि गर्भनिरोधक का उपयोग करने वाली महिलाएं स्वच्छंद हो सकती हैं। इस सर्वे में देश के 28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों के 707 जिलों से करीब 6.37 लाख सैंपल लिए गए। चंडीगढ़ में सबसे अधिक 69% पुरुषों का मानना है कि गर्भनिरोधक अपनाना महिलाओं का काम है और पुरुषों को इस बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। केरल में सर्वेक्षण में शामिल 44.1 प्रतिशत पुरुषों के अनुसार गर्भनिरोधक का उपयोग करने वाली महिलाएं स्वच्छंद हो सकती हैं। केवल 5 राज्य ऐसे हैं, जहां प्रजनन दर 2.1% से ज्यादा है। ये हैं – बिहार, मेघालय, उत्तर प्रदेश, झारखंड और मणिपुर।

घरेलू हिंसा के मामले बढ़े

NFHS की रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं पर घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं। देश भर में 79 फीसदी महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार है। 79.4% महिलाएं कभी भी अपने पति के जुल्मों की शिकायत ही नहीं करतीं।

शहरों के मुकाबले गांवों में घरेलू हिंसा ज्यादा

सेक्सुअल असॉल्ट के मामले में भी स्थिति खराब है। देश की 99.5 फीसदी महिलाएं ऐसे मामलों में चुप्पी साध लेती हैं। शहरों के मुकाबले गांवों में घरेलू हिंसा ज्यादा आम है। सेक्सुअल हिंसा के केस में सर्वे 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के 707 जिलों में किया गया। देश में 59 फीसदी महिलाओं को बाजार, हॉस्पिटल या गांव से बाहर जाने की इजाजत नहीं मिलती। जहां तक रोजगार की बात है तो शादीशुदा 32 फीसदी महिलाएं नौकरी करती हैं।

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