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Saturday, November 26, 2022

Navratri 2022: नवरात्रि में ना पहनें ये कपड़े, देवी मां हो जाती हैं नाराज, जानें घट स्थापना का मुहूर्त

New Delhi: शारदीय नवरात्रि (Navratri) 26 सितंबर दिन सोमवार से शुरू हो रहा है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा के लिए घटस्थापना करते हैं और व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करते हैं। इससे मां दुर्गा की कृपा से हर मनोकामना पूरी होती है। शक्ति की भक्ति का पर्व शारदीय नवरात्रि (Navratri) अश्विन माह की प्रतिपदा तिथि से शुरू होगा। 26 सितंबर से 5 अक्टूबर 2022 तक देवी की आराधना की जाएगी। मां दुर्गा शक्ति साधना के लिए नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के लिए बहुत शुभ और फलदायी माने जाते हैं।

पहले दिन कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। इस साल मां दुर्गा का आगमन बेहद शुभ संयोग में हो रहा है। आइए जानते हैं शारदीय नवरात्रि (Navratri) घटस्थापना, पूजा की सामग्री और मुहूर्त:

नवरात्रि (Navratri) 2022 घटस्थापना मुहूर्त

कलश स्थापना अभिजीत मुहूर्त- 11:54 AM – 12:42 PM (26 सितंबर 2022)
अवधि- 48 मिनट

कलश स्थापना विधि

कलश की स्थापना मंदिर या घर के उत्तर-पूर्व दिशा में करनी चाहिए। मां की चौकी लगा कर कलश को स्थापित करना चाहिए। स्नानादि करने के बाद सबसे पहले कलश स्थापना वाली जगह को गाय के गोबर से लीप लें या गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर लें। फिर लकड़ी की चौकी पर लाल रंग से स्वास्तिक बनाकर कलश को स्थापित करें। कलश में जल या गंगाजल भरें और इसमें आम का पत्ता रखें। इसके बाद कलश के ऊपर रखी जाने वाली प्लेट में कुछ अनाज भर लें और उसके ऊपर नारियाल रखें। साथ में एक सुपारी, कुछ सिक्के, दूर्वा, हल्दी की एक गांठ कलश में डालें। चावल यानी अक्षत से अष्टदल बनाकर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें। इन्हें लाल या गुलाबी चुनरी ओढ़ा दें।

कलश स्थापना के साथ अखंड दीपक की स्थापना भी की जाती है। कलश स्थापना के साथ ही पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करें। हाथ में लाल फूल और चावल लेकर मां शैलपुत्री का ध्यान करके मंत्र जाप करें और फूल और चावल मां के चरणों में अर्पित करें। मां शैलपुत्री के लिए जो भोग बनाएं। अखंड ज्योति में गाय का घी शुद्धता के साथ घर में बना घी ही बेहतर होगा।

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना सामग्री

-स्वच्छ मिट्‌टी, मिट्‌टी या तांबे का कलश और साथ में ढक्कन
-सप्तधान्य (7 प्रकार के अनाज) – जौ, मूंग, चावल, तिल, कंगनी
-पांच पल्लव – अशोक के पत्ते, आम पत्ते, पीपल पत्ते, गुलर, बरगद के पत्ते
-जौ बोने के लिए चौड़े मुंह वाला मिट्टी का पात्र
-चौकी, लाल कपड़ा, गंगाजल, चंदन
-सुपारी, मौली, इत्र, फूल माला, लाल पुष्प
-जटा वाला नारियल, अक्षत, दूर्वा, धूप, सिक्का
-पान, इलायची, लौंग, अगरबत्ती

26 सितंबर को शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- 04:36 AM से 05:23AM तक।
अभिजित मुहूर्त- 11:48AM से 12:36PM तक।
विजय मुहूर्त- 02:13PM से 03:01PM तक।
गोधूलि मुहूर्त- 06:01PM से 06:25PM तक।
अमृत काल 12:11AM, सितम्बर 27 से 01:49 AM तक

इन तारीखों में पड़ेंगे नवरात्रि (Navratri) के 9 दिन

26/09/2022 – प्रतिपदा, नवरात्रि का पहला दिन
27/09/2022 – द्वितीया, नवरात्रि का दूसरा दिन
28/09/2022 – तृतीया, नवरात्रि का तीसरा दिन
29/09/2022 – चतुर्थी, नवरात्रि का चौथा दिन
30/09/2022 – पंचमी, नवरात्रि का पांचवां दिन
01/10/2022 – षष्ठी नवरात्रि का छठा दिन
02/10/2022 – सप्तमी, नवरात्रि का सातवां दिन
03/10/2022 – अष्टमी, नवरात्रि का आठवां दिन
04/10/2022 – नवमी, नवरात्रि का नवां दिन

नवरात्रि (Navratri) में न करें ये काम

-यदि आप शारदीय नवरात्रि (Navratri) में 9 दिन का व्रत रख रहें हैं एवं अपने घर में घटस्थापना कर अखंड ज्योति जला रखें हैं, तो ऐसी स्थिति में घर को अकेला बिल्कुल न छोड़ें. अर्थात घर में कोई न कोई रहे जरूर।
-यदि नवरात्रि में घटस्थापना कर मां दुर्गा को आमंत्रित किया है, तो आप को सुबह शाम दोनों समय आरती और पूजा पाठ करना न भूलें। साथ ही मां को संबंधित दिन का भोग जरूर लगाएं। नहीं तो मां नाराज हो जाएंगी।
-नवरात्रि में साफ-सफाई करना न भूलें। इस दौरान सूर्योदय के साथ ही स्नानादि कार्य समाप्त कर साफ़ वस्त्र पहनकर पूजा जरूर करें।
-नवरात्रि के 9 दिनों तक काले रंग के वस्त्र बिल्कुल न पहनें। चमड़े की बनी बेल्ट, जूते आदि सामग्री को धारण न करें।
-नवरात्रि के दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून न कटवाएं।
-नवरात्रि के दौरान घर में शांति स्थापित करें। किसी से भी लड़ाई-झगडे और कलह न करें।
-नवरात्रि में तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन और मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल भी करें। इसके साथ ही नवरात्रि में अनाज और नमक का सेवन न करना उत्तम होता है। इस दौरान केवल सात्विक चीजों का सेवन, या फलाहार करें।
-नवरात्रि में व्रत रखने वालों को नौ दिनों तक बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए। इन्हें जमीन पर चटाई बिछाकर सोना चाहिए।
-शारदीय नवरात्रि व्रत के दौरान दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय किसी दूसरों से न बोलें। नहीं तो पूजा अधूरी मानी जाती है।
-नवरात्रि में किसी के भी प्रति नकारात्मक विचार अपने मन में नहीं लाना चाहिए और न ही किसी को परेशान करना चाहिए।

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