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Saturday, May 28, 2022

मकर संक्रांति: 29 साल के बाद बन रहा यह दुर्लभ संयोग, इन राशियों को देगा शुभ परिणाम

New Delhi: 14 जनवरी को मकर राशि में सूर्य और शनि ग्रह का होना बड़ा ही दुर्लभ संयोग है और यह संयोग 29 साल के बाद 14 जनवरी 2022 को पड़ रहा है। इससे पूर्व यह योग 1993 में पड़ा था। सूर्य ग्रह के मकर राशि में प्रवेश करने के कारण मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 14 जनवरी को पड़ रहा है। मकर संक्रान्ति के दिन गंगा स्नान और दान पुण्य का विशेष महत्व है।

मान्यता है कि मकर संक्रान्ति के दिन देव भी धरती पर अवतरित होते हैं और आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है। इसी दिन सूर्य देव मकर राशि में गोचर करेंगे। साथ ही अभी शनि देव भी मकर राशि में ही विराजमान हैं। 14 जनवरी को मकर राशि में सूर्य और शनि ग्रह का होना बड़ा ही दुर्लभ संयोग है और यह संयोग 29 साल के बाद 14 जनवरी 2022 को पड़ रहा है। इस अनयोग का प्रभाव राशियों पर भी पड़ेगा। आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में जिनके कार्यक्षेत्र में यह योग शुभ परिणाम प्रादन करेगा।

पिछले साल 2021 में सामान्य रहने के बाद एक बार फिर इस वर्ष मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी के चक्कर में फंसा है। कुछ पंचागों के अनुसार 14 जनवरी तो कुछ के अनुसार 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना शुभ है। इसलिए कुछ लोग शुक्रवार तो कुछ लोग शनिवार को पूजा-पाठ व दान-पुण्य के बाद चूड़ा-दही व गुड़ के साथ तिलुकट आदि ग्रहण करेंगे। शास्त्र व पंचागों के अनुसार पुण्यकाल में चूड़ा-दही व तिल खाना शुभ होगा। हालांकि वर्षों से चली आ रही 14 जनवरी वाली परंपरा को मानने वाले इस दिन चूड़ा-दही ग्रहण करेंगे।

आचार्य पं. श्री विन्ध्येश्वरी प्रसाद अवस्थी ने बताया कि भगवान सूर्य बारह राशियों के भ्रमण के दौरान जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इसे ही सरकात, लोहड़ा, टहरी, पोंगल आदि नामों से जानते हैं। मकर राशि के सूर्य होने पर तिल खाना शुभ होता है।

कुछ पंचागों के अनुसार, 14 जनवरी की दोपहर में सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं तो कुछ में रात में। आचार्य पं. श्री विन्ध्येश्वरी प्रसाद अवस्थी के अनुसार 14 जनवरी की दोपहर 2.29 बजे मकर राशि में सूर्य प्रवेश कर रहे हैं और पुण्यकाल शनिवार को 6.27 बजे से है।

ब्रदीकाशी पंचाग के अनुसार दोपहर में 2.29 व शताब्दी के अनुसार दोपहर 1.21 मकर राशि के सूर्य हो रहे हैं। जबकि अन्नपूर्णा पंचाग के अनुसार 14 जनवरी की रात 8.18 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और 4.18 बजे से। हनुमान पंचाग के अनुसार रात 10.19, आदित्य के अनुसार रात 8.12, गणेश आपा के अनुसार रात 8.01, हृषिकेश (हरिहर) के अनुसार रात 8.49, हृषिकेश शिवमूर्ति के अनुसार रात 8.49, दैनन्दिनी के अनुसार रात 8.49 और विश्व के पंचांग के अनुसार शाम 7.59 और महावीर पंचाग के अनुसार रात 8.34 बजे मकर राशि में सूर्य प्रवेश करेंगे।

आचार्य ने बताया कि पंचांगकार ग्रंथिय प्रमाण के आधार पर संक्रांति प्रवेश काल से 8 या 16 घंटा पहले या बाद पुण्यकाल होता है। गया में सूर्योदय 6.41 बजे यानी पुण्यकाल सूर्योदय से पहले शुरू होता है।

चूड़ा, तिल, मिठाई, खिचड़ी सामग्री व गर्म कपड़े दान करने से सुख-समृद्धि

आचार्य पं. श्री विन्ध्येश्वरी प्रसाद अवस्थी ने बताया कि मकर राशि के सूर्य के साथ ही पुण्यकाल में स्नान व दान के बाद चूड़ा-दही व तिल खाना शुभ होगा। पुण्यकाल में स्नान के बाद तिल का होम करने और चूड़ा, तिल, मिठाई, खिचड़ी सामग्री, गर्म कपड़े दान करने व इसे ग्रहण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। आचार्य ने कहा कि मकर राशि के सूर्य होते ही सूर्यदेव उतरायण हो जाते हैं और देवताओं के दिन और दैत्यों के लिए रात शुरू होती है। खरमास खत्म होने के साथ ही माघ माह शुरू हो जाता है।

ये है धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति के दिन ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर में जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में उड़द की दाल को शनि देव से संबंधित माना गया है। ऐसे में इस दिन उड़द की दाल की खिचड़ी खाने और दान करने से सूर्यदेव और शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। आपको बता दें, चावल को चंद्रमा का, नमक को शुक्र का, हल्दी को गुरू बृहस्पति का, हरी सब्जियों को बुध का कारक माना जाता है. वहीं, खिचड़ी की गर्मी से इसका संबंध मंगल से जुड़ता है। इसलिए मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने से कुंडली में हर तरह के ग्रहों की स्थिति में सुधार होता है।

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