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Thursday, August 18, 2022

जाने जागृति अवस्थी UPSC 2020 में कैसे लाईं दूसरी रैंक, कितने घंटे करतीं थी स्टडी, टीवी और मोबाइल से कितना रहतीं थी दूर

UPSC पर फोकस कर रही जागृति ने मोबाइल से दूरी बना ली थी। यहां तक कि वे टीवी भी नहीं देखतीं थी। घर के बरामदे में भी घूमती थीं, तो हाथ में किताब ही होती थी। टॉपर बनने का कभी नहीं सोचा था, लेकिन हर हाल में UPSC एग्जाम क्लियर करना था, ताकि IAS बनकर सेवा कर सकें। यह कहना है जागृति का।

Bhopal: कई बार एक सेफ जोन में पहुंचने के बाद हम आगे बढ़ने के लिए प्रयास करना छोड़ देते हैं, जो मिल जाता है, उसी से संतुष्ट कर लेते हैं। ऐसे में हमारी सफलता भी उसी सेफ जोन के फेस में उलझ कर रह जाती है। लेकिन जिनको कुछ अलग करने की चाहत है, वे जब तक उसे प्राप्त न कर लें तब तक प्रयास करना नहीं छोड़ते हैं। हर दिन सफलता के लिए प्रयास करते रहते हैं। सेफ जोन में पहुंचने के बाद भी कुछ ऐसा ही प्रयास किया है भोपाल की जागृति अवस्थी ने। UPSC 2020 के एक्जाम में पूरे देश में जागृति अवस्थी ने दूसरी रैंक प्राप्त की हैं। इस सफलता से जागृति ने न सिर्फ अपने माता-पिता बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है। देश भर से जागृति को बधाई देने वालों का तांता लगा है।

पेरेंट्स की सहमति के बाद भेल से दे दिया था इस्तीफा

जागृति स्टडी में ऐसे जुटीं कि UPSC के अलावा उन्हें कुछ नहीं दिखाई दिया। पहले यूपीएससी की स्टैंडर्ड बुक्स तलाशी और फिर पढ़ाई प्रारंभ की। हर दिन 8 से 9 घंटे पढ़ाई करतीं थी। जब एग्जाम करीब आए तो 12 से 14 घंटे तक पढ़ाई करने लगीं। भोपाल के गवर्नमेंट होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. एससी अवस्थी की बेटी जागृति ने उनसे कहा कि ‘पापा मुझे UPSC क्लियर करना है’। ये बात सुनकर पिता डॉ. अवस्थी एक पल के लिए गहरी सोच में पड़ गए, क्योंकि तब बेटी BHEL (भेल) में इंजीनियर थी। सैलरी भी अच्छी थी। ओहदा भी बड़ा था। डॉ. अवस्थी ने सैलरी और ओहदे की बात कहते हुए सहमति दे दी। बेटी ने भी सुबह होते ही नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद UPSC में बैठकर IAS बनने की तैयारी शुरू कर दी। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिल सकी। इसके बावजूद हार नहीं मानी। जागृति ने इससे सीख ली कि इसमें कहीं ज्यादा मेहनत लगेगी। हौसले के साथ फिर से जुट गई।

बच्चों की शिक्षा और महिलाओं के अधिकार पर ज्यादा करेंगी फोकस

जुलाई-2019 में UPSC की पढ़ाई शुरू की। शुरुआती 8-9 महीने तक रोज 8 से 10 घंटे पढ़ाई की। इसके बाद पढ़ाई तेज कर दी। रोज 12 से 14 घंटे तक पढ़ाई करती रही। बीच में कोरोना आया तो स्ट्रेटजी चेंज की। करंट अफेयर्स की ओर ज्यादा फोकस किया। UPSC में ओवरऑल सेकंड रैंक अनएक्स्पेक्टेड है। हार्ड वर्क और पेरेंट्स की बदौलत ये संभव हो पाया है। मैंने 2017 से 2019 तक भेल में जॉब की। एग्जाम क्लियर करने की शुरुआत वहीं से कर दी थी। साल 2019 में पहला अटैम्प किया, लेकिन प्रीलिम्स भी नहीं निकाल पाई। इसके बाद जुलाई 2019 से फिर पढ़ाई शुरू की। कोरोना ने कई चुनौतियां थीं, लेकिन पढ़ाई जारी रखी। शुरुआती कोचिंग की मदद ली, लेकिन कोरोना की वजह से घर ही पढ़ी। जागृति ने कहा कि रूरल डेवलपमेंट, चिल्ड्रेन एजुकेशन और वूमेन राइट्स में काम करना चाहती हूं। वह देहाती जीवन को बेहतर बनाने के साथ बच्चों की शिक्षा और महिलाओं के अधिकार पर ज्यादा फोकस करेंगी।

टीम बेबाक

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