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Friday, October 7, 2022

कामद गिरि पर्वत चित्रकूट: दुनिया का एक ऐसा पर्वत जिसके दर्शन मात्र से पूरी होती है भक्तों की मुरादें

अपने वनमास काल के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता सहित लक्ष्मण भगवान संग कामद गिरि पर्वत पर ही रुके थे। चित्रकूट की इस पावन धरा पर उन्होंने 11 वर्ष व्यतीत किए। कामद गिरि पर्वत पर भगवान श्रीराम के रुकने की वजह से इस पर्वत का महत्व काफी बढ़ा। चित्रकूट से जब भगवान श्रीराम जा रहे थे तब कामद गिरि पर्वत को उन्होंने यह आशीर्वाद प्रदान किया था कि यहां आने वाले भक्तों की सारी मुरादें आपके दर्शन मात्र से ही पूरी हो जाएंगी। आपके सामने उन्हें कुछ मांगने की आवश्यकता नहीं होगी। तब से इस पर्वत को कामद अर्थात् कामनाओं को पूर्ण करने वाला भी कहा जाता है।

मुख्य बातें

  • परिक्रमा करने का है विशेष महत्व, पांच कोष का है कामद गिरि का परिक्रमा मार्ग,
  • गुप्तगोदावरी, सतीअनसुइया, रामघाट, आरोग्य धाम, हनुमान धारा, स्फिटिक शिला, रघुबीर मंदिर हैं यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थल चित्रकूट आने वाले अधिकांश पर्यटक सड़क और रेल मार्ग से आते हैं।

Bhopal: चित्रकूट की महिमा अमिट है। देव, दानव से लेकर मानव तक सबकी इच्छा चित्रकूट में वास करने की होती है। भगवान श्रीराम की तपस्थली में सब अपने दिन व्यतीत करने की इच्छा शक्ति जाग्रत करते हैं। यदि प्रयाग राज को तीर्थों का राजा कहा जाता है तो चित्रकूट को सभी तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है। भारत वर्ष में जो हमें पुण्य सभी तीर्थों का भ्रमण करने में मिलता है, वहीं पुण्य हम केवल चित्रकूट पहुंचकर प्राप्त कर सकते हैं। इसीलिए सदियों से ऋषि-मुनियों ने अपनी साधना के लिए इस पावन भूमि का चयन किया था।

किदवंतियों में इस बात का भी उल्लेख है कि जब प्रयाग राज को पता चला की चित्रकूट सभी तीर्थों का तीर्थ है, तो वे स्वंय ही वर्ष में एक बार चल कर चित्रकूट पहुंचने लगे। भगवान श्रीराम ने अपने वनमास काल के दौरान यहां के जंगलों में माता सीता और शेषनाग अवतार लक्ष्मण जी संग 11 वर्ष 6 माह 18 दिन व्यतीत किए हैं। प्रभू श्रीराम के रुकने से चित्रकूट की कण-कण भूमि का महत्व बढ़ा है। यहां पेड़, पौधे, वन, उपवन और पशु पक्षी समेत चित्रकूट के निजवासी सब धन्य हुए हैं। गुप्तगोदावरी, सती अनसुइया, कामदगिरि पर्वत, लक्ष्मण पहाड़िया, रामघाट, आरोग्य धाम, हनुमान धारा, स्फटिक शिला, रघुबीर मंदिर आदि यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।

मनमोहक और मनोकामना पूर्ण करने वाला है, कामद गिरि पर्वत

भारत वर्ष पर्वत और पठारों से एक संपन्न राष्ट्र है, जहां अनेक दिव्य पर्वत और नदियां सदियों प्रवाहित हो रही हैं। लेकिन उनमें से चित्रकूट में में स्थित कामद गिरि का पर्वत पूरी दुनिया के लिए अनोखा है। यह पर्वत दुनिया के सबसे खूबसूरत पर्वतों में सुमार है। इसी कामद गिरि पर्वत पर प्रभू श्रीराम अपने वनवास काल के दिन काटे थे। चित्रकूट आने वाले श्रद्धालु कामद गिरि पर्वत की परिक्रमा जरुर करते हैं।

कहा जाता है कि कामद गिरी पर्वत के दर्शन मात्र से ही लोगों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है। इस पर्वत के समक्ष लोगों को कुछ मांगने की आवश्यकता नहीं होती है। कामद गिरि स्वंय ही अपने भक्तों की कामनाओं को जान जाते हैं। इसलिए इनको कामद नाम से जाना जाता है। भागवान श्रीराम जब कामद गिरि पर्वत से जाने लगे थे तो कमद गिरि करुणा भाव से भागवान से अपनी प्रार्थना की थी। तब भगवान श्रीराम कामदगिरी को मनोकामना पूर्ण करने वाला वरदान दिया था। कामद गिरि का परिक्रमा मार्ग पांच कोष है। यह पर्वत आज भी कई तरह के रहस्यों को संजोय हुए है। ये भी कहा जाता है कि इस पर्वत के अंदर आज भी कई ऋषि-मुनी सदियों से साधना रत हैं। इसकी चोटी पर आज तक कोई नहीं पहुंच पाया।

एक ऐसा चोर जिसका पाप खाकर भरता है पेट

वनों से घिरे चित्रकूट को प्रकृति और ईश्वर की अनुपम देन कहा जाता है। मंदाकिनी नदी के किनारे बने अनेक घाट और मंदिरों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इन्हीं में से एक तीर्थ है गुप्त गोदावरी। यहां खटखटा चोर दर्शनार्थियों के कौतूहल और आकर्षण का केंद्र है। ऐसा माना जाता है कि ये खटखटा चोर पाप खाकर पेट भरता है और इसके दर्शन करने वाले के घर कभी भी चोरी नहीं होती। चित्रकूट के गुप्त गोदावरी तीर्थ पर सदियों से ये परंपरा बरकरार है। देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु गुफा के अंदर पत्थर के रूप में लटके इस चोर का पूजन करते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं। गुफा के आसपास दुकानदार व यहां रहने वाले अन्य लोगों से इस चोर के बारे में किवदंतियां सुनी जा सकती हैं।

मान्यता अनुसार माता सीता एक दिन गुप्त गोदावरी गुफा में स्नान कर रहीं थीं। इसी दौरान मयंक नाम के राक्षस ने उनके वस्त्र चोरी कर लिए। इस पर सीता जी ने अपने सिर के बाल उखाड़ कर उसे श्राप दिया। इससे मयंक राक्षस पत्थर का बन गया। जब उसने अनुनय-विनय की कि इस तरह तो वह भूखा मर जाएगा। तब माता सीता ने उससे गुफा में आने वालों के पाप खाकर भूख मिटाने और युगों-युगों तक उसका नाम बने रहने का वरदान दिया।

सतना जिले के अंतर्गत चित्रकूट में गुप्त गोदावरी पर स्थित गुफा के अंदर पत्थर के रूप में लटके इस चोर को हिलाने से खटखट की आवाज होती है। इसलिए इसे खटखटा चोर कहा जाने लगा। ऐसा माना जाता है कि वह गुफा की सुरक्षा भी करता है। इसलिए छूने पर आवाज निकलती है। अब गुफा के अंदर इस स्थान पर एक मंदिर बना दिया गया है। लोग इस पर फल-फूल रुपये भी चढ़ाते हैं।

कई गौरवशाली संस्थान भी चित्रकूट में हैं स्थित

अब चित्रकूट कई गौरवशली संस्थानों की वजह से भी जाना और पहचाना जाता है। चित्रकूट में ऐसे कई बड़े राष्ट्रीय स्तर के संस्थान हैं, जो पूरे भारत वर्ष में अपने सेवाभावी और विकास कार्यों की वजह से जाने जाते हैं। उनमें से जानकी कुंड, सदगुरु नेत्र चिकित्सालय, ग्रामोदय विश्वविद्यालय, दिव्यांग विश्वविद्यालय, आरोग्य धाम, पं दीन दयाल शोध संस्थान समेत अन्य संस्थाओं के नाम शामिल हैं। इन संस्थानों से न सिर्फ क्षेत्र का विकास हुआ है बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाने में भी इनकी महत्पवूर्ण भूमिका रही है।

तरुण चतुर्वेदी, भोपाल

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