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Thursday, August 18, 2022

इस झरने का एक बूंद पानी ही बता देता है पाप-पुण्य का हिसाब, लेकिन हर किसी को नहीं दिखता

नई दिल्ली: शस्त्रों में पाप-पुण्य के बारे में अनेकों कहानियां और अनेकों बातें बताई गई है। उन मान्यताओं में से सबसे बड़ी मान्यता रही है गंगा स्नान। गंगा स्नान मात्र से ही ही पाप खत्म हो जाता है। शास्त्रों में ये कहा गया है कि पाप को धोने के लिए मां गंगा धरती पर हैं। लेकिन इन सब से हट कर एक अन्य भी मान्यता है।

अभी तक मान्यताये रही है की मां गंगा में स्नान मात्र से ही सभी के पाप धुल जाते है, लेकिन कम ही लोगों को पता होगा कि उत्तराखंड में एक ऐसा झरना भी मौजूद है जिसकी एक बूंद शरीर पर पड़ने मात्र से सभी पाप धुल जाते है और व्यक्ति आजीवन निरोगी हो जाता है।

यू तो उत्तराखंड राज्य में धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से कई स्थल हैं। लेकिन इस राज्य में कई स्थल ऐसे भी हैं जो अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए हैं। आज हम बात कर रहे हैं बद्रीनाथ धाम से 8 किलोमीटर दूर वसुधारा झरने के बारे में जो झरना करीब 425 फिट ऊपर पहाड़ों से गिरता है।

इस झरने से जुडी कई मान्यताएं हैं। मान्यता यह भी है कि इस झरने से गिरते पानी में से एक बूंद भी पानी आपकी आत्मा को पुण्य आत्मा या पापी आत्मा करार दे सकती है। साथ ही कहा यह भी जाता है कि जिस व्यक्ति के ऊपर इस झरने का पानी पड़ता है वह हमेशा के लिए निरोगी हो जाता है। आखिर क्या है वसुधारा झरने का रहस्य?

उत्तराखंड राज्य की इन खूबसूरत वादियों में यूं तो कई झरने मौजूद हैं। जहां हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं। लेकिन बद्रीनाथ से 8 किलोमीटर ऊपर माणा गांव के समीप स्थित वसुधारा झरने की अपनी अलग कई मान्यताएं हैं और यही वजह है कि जो श्रद्धालु बाबा बद्रीनाथ के दर्शन करने आते हैं वह वसुधारा झरना देखने जाने को लालायित रहते हैं। यही नहीं वसुधारा झरने की मान्यताएं ऐसी है, जो लोगों के जहन में वहां जाने को लेकर उत्सुकता बढ़ा देती है।

कहां स्थित है वसुधारा झरना

स्थानीय निवासियों के अनुसार उत्तराखंड के उच्च हिमालय क्षेत्र स्थित बद्रीनाथ धाम से करीब 3 किलोमीटर आगे सीमांत गांव, माणा गांव है और माणा गांव से करीब 5 किलोमीटर पैदल रास्ता, जो स्वर्गारोहणी के लिए जाता है। जहां से महाभारत काल के दौरान पांडव स्वर्ग लोग गए थे, उसी मार्ग पर पहाड़ों के बीच ये मनमोहने वाला झरना मौजूद है, इसी झरने को वसुधारा झरना कहते हैं। वसुधारा झरने की धार्मिक महत्व है कि जो व्यक्ति वसुधारा झरने का दर्शन करता है और हवा के माध्यम से जिस व्यक्ति के ऊपर वसुधारा झील का जल पड़ता है, उस व्यक्ति की आत्मा, पुण्य आत्मा होती है।

झरने के पानी से मिलता है मोझ

बद्रीनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहित ऋषि प्रसाद सती ने बताया कि वसुधारा झील के कई महत्व है और वहां पर असंख्य धाराएं हैं। शास्त्रों के मुताबिक वसुधारा की धारा किसी को दिखाई देती है किसी को दिखाई नहीं देती है और जिस इंसान पर धारा की बूंदे पड़ती है वह भगवान बद्रीनाथ के चरण में चला जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही बताया कि हम अपने पूर्व जन्मों के संस्कारों को और कर्मों को लेकर पैदा होते हैं और उसी के अनुसार वर्तमान समय में व्यक्ति को कर्म मिलता है। जिसने जैसा कर्म किया होता है उसे वैसा फल मिलता है और इसी का प्रत्यक्ष उदाहरण है कि वसुधारा का जल किसी-किसी पर पड़ता है।

पाप-पुण्य का होता है यहां हिसाब किताब

वहीं माणा गांव के कुलपुरोहित कुलदीप कोठियाल ने बताया कि वसुधारा झरने का वर्णन भागवत गीता में भी है, जिसमे लिखा है की नर-नारायण की माता, मूर्ति और मूर्ति के पतिदेव थे धर्म। और वसुधारा में धर्म जी ने ही यहां तपस्या की थी। इसके साथ ही यहां अष्ट वसुओ ने भी तपस्या की थी। और अष्ट वसुओं द्वारा किए गए तपस्या के पुण्य से ही पानी की धारा निकली। जिस धारा को वसुधरा कहते है। साथ ही बताया कि वसुधार का महत्व है कि वसुधारा का जल हर किसी के ऊपर नही पड़ता है। किसी किसी के ऊपर वसुधारा का जल पड़ता है। और आज भी वहां जाकर पाप और पुण्य का पता चलता है।

टीम बेबाक

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