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Sunday, December 5, 2021

क्या आपने कभी सोचा है पिता बनकर एक पुरुष कैसा महसूस करता है, तो जानिए एक पिता बनने का सफर

New Delhi: क्या आपने कभी सोचा है पिता बनकर एक पुरुष कैसा महसूस करता है। हम हमेशा से सुनते आए हैं कि एक बच्चे के जन्म के समय एक मां का भी जन्म होता है। नौ माह की शारीरिक बदलाव की पीड़ा और फिर प्रसव पीड़ा तब कहीं जाकर एक बच्चा और एक मां जन्म लेते हैं। बच्चे के जन्म के बाद मां सीखती है मां होना क्या है मां होने की जिम्मेदारी क्या है। कब बच्चे को भूख लगी है कब बच्चे को नींद आ रही है कब उसे कोई तकलीफ है ये सब मां धीरे-धीरे समझने लगती है मां के लिए कड़ी तपस्या होती है बच्चे को बड़ा करने की ज़िम्मेदारी। पर मां की तपस्या के बीच क्या हम पिता के त्याग को उपेक्षित नहीं कर देते

हर पिता का प्यार लहू बनकर रोज पसीने में बहता रहता है

मां का प्यार तो कभी पकवान कभी लोरी कभी बुखार में माथे पर रखी ठंडी पट्टी के रूप में बच्चों तक पहुंच जाता है। पिता का प्यार लहू बनकर रोज पसीने में बहता रहता है दफ़्तर में कैद रह जाता है। एक बच्चे के जन्म के बाद वो पिता भी तो पिता होना सीख रहा होता है। उसके लिए भी सब नया ही तो होता है। अक्सर समाज में सिर्फ इस बात पर गौर किया जाता है कि पिता लापरवाह होते हैं या पुरुष नहीं समझते मां बनना कितना कठिन है। लेकिन क्या इसे इस तरह से नहीं समझा जा सकता कि पुरुष ने भले बच्चे को जन्म ना दिया हो पर उसे भी बच्चे से उतना ही लगाव होता है, हां बच्चे को पालने के गुण सीखने में मां की तुलना में पिता को थोड़ा समय जरूर लग सकता है पर वो सीखना चाहते हैं एक पुरुष एक अच्छा पिता भी बनना चाहता है। इसलिए हमने सोचा क्यों ना कुछ पिताओं से उनकी भावनाएं उनका पिता बनने का सफर साझा करने को कहा जाए

जानिए आप भी पिता बनकर कैसा महसूस करते हैं ये

ये दिन मेरे जिंदगी का सबसे अनमोल दिन था जिस दिन मुझे पता चला कि मैं पिता बनने वाला हूं मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था शुरू में जिम्मेदारी नहीं समझ आई सब नॉर्मल ही था जैसे जैसे डिलीवरी की तारीख पास आई वैसे वैसे मुझे अपनी जिम्मेदारियां का समझ आना शुरू हुआ। वाइफ की केयर तो सब करते हैं लेकिन उन दिनों उन्हें ज़रूरत होती है अपने पति से क्वालिटी टाइम कीहंसी खुशी वाले पल थोड़ी बहुत मस्ती और वाइफ की सारी जरूरतों का ख्याल रखने की क्योंकि प्रेग्नेंसी के टाइम पे वे आप पे निर्भर होती हैं। वाइफ के डिलीवरी का दिन मुझे याद है सब टेंशन में थे पत्नी को दर्द में देखना बहुत भावुक कर रहा था मुझे बस यही दुआ थी के मां बच्चा दोनो ठीक रहे और ऊपर वाले की दुआ से दोनो हेल्दी थे ।

पिता बनकर परवरिश करने का आनंद ले रहा हूं

जबलपुर के अनुज नीले कहते हैं कि जब पहली बार मैंने अपने बेटे को हाथों में लिया था तो ऐसा लगा दुनिया की सबसे अनमोल चीज मेरे पास है। वो फीलिंग हाय सबसे गजब है। आज हमारा बेटा नौ महीने का हो गया है। रात को सोने नहीं मिलता और दिन में शांति से बैठने नहीं मिलता फिर भी मैं कहता हूं कि मैं सबसे खुश व्यक्ति हूं और पिता बनकर परवरिश करने का आनंद ले रहा हूं। घर पर सब खुश है मस्ती का माहौल बना हैं रौनक बनी हुई है और लोग बोलते हैं ना घर मैं बड़े बुजुर्ग का होना जरूरी है उतना ही बच्चों का होना भी उतना ही जरूरी है।

पिता बनाना एक ऐसा एहसास है जिसे अल्फाजों में उतरना मुश्किल

पुणे के साफ्टवेयर इंजीनियर अपूर्व खरे कहते हैं कि जब मैं अस्पताल में था और उस समय पत्नी को डिलेवरी के लिए ले जाया गया। मैं बेचैनी के साथ बाहर इंतज़ार कर रहा था। कुछ देर बाद डॉक्टर लेकर आई मेरी नन्ही परी को वो पहली बार जब उसने अपनी प्यारा सी आंखों से मुझे देखा ऐसा लगा मानो मेरा सारा बस प्यार इसी के लिए हो। आंखें अपने आप नम हो गईं। मैं उस वक्त और अपने अंदर एक अलग ही जिम्मेदारी सी महूसस की। अब ​​मेरी बेटी 4 महीने की होने को आ गई है उसके साथ बिताया हुआ हर वक्त मेरा दिन का सबसे अच्छा समय होता है। जब भी हंसती मुस्कुराती है मेरा मन भी मुस्कुरा जाता है।

(बेबाक न्यूज के लिए निधि खरे की रिपोर्ट)

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