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Friday, October 7, 2022

गैविनाथ सरकार: दुनिया का एक ऐसा अलौकिक शिवलिंग जिसकी आस्था और शक्ति आज भी है अखंडित

सतना जिले के बिरसिंहपुर क्षेत्र में स्थित गैविनाथ धाम की महिमा और उनकी भक्ति यहां के दूरदराज के भक्तों में आसानी से देखी जा सकती है। इस शिवलिंग को महाकाल का उपलिंग भी कहते हैं। तो वहीं कुछ भक्त फटहा बाबा के नाम से भी इन्हें पुकारते हैं।

मुख्य बातें

  1. अब 2 करोड़ की लागत से हो रहा है मंदिर के तलाब का सौंदौरियकरण
  2. पाताल कोट से निकली है भगवान शिव की यह दिव्य प्रतिमा
  3. शिव के अनन्य भक्त राजा वीर सिंह की भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हुए थे गैविनाथ सरकार

Bhopal: फटहा बाबा, गैविनाथ ऐसे ही कुछ अन्य नामों से पुकारे जाते हैं सतना जिले के बिरसिंहपुर में स्थित गैविनाथ सरकार। जिनकी एक झलक पाने के लिए यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। कहा ये भी जाता है कि गैविनाथ सरकार की यह प्रतिमा उज्जैन वाले महाकाल का उपलिंग है। हमें जितना फल उज्जैन वाले महाकाल बाबा के दर्शन करने से प्राप्त होता है, उतना ही फल हमें बिरसिंहपुर के गैविनाथ सरकार के दर्शन करने से प्राप्त होता है। इसलिए यह स्थल हमेशा से लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है। वीरसिंह भगवान महाकाल के अनन्य भक्त थे, जो रोजाना बिरसिंहपुर से उज्जैन महाकाल के दर्शन करने जाते थे। राजा वीरसिंह पर महाकाल बाबा प्रसन्न होकर उनके नगर बिरसिंहपुर में प्रकट हुए।

पाताल कोट से निकले हैं गैविनाथ

गैविनाथ सरकार की यह प्रतिमा पाताल कोट से निकली है। जिसका वर्णन पुराणों में भी मिलता है। गैवी गुप्ता के घर से चूल्हे में प्रारंभिक समय में यह प्रतिमा निकली। घर की महिला शिवलिंग को पत्थर समझ कर रोजाना खल से जमीन पर दाबने का प्रयास करती थी। पर गैविनाथ भगवान की यह प्रतिमा रोजाना स्वयं ऊपर की ओर निकल आती थी। जब इस बात की जानकारी राजा वीरसिंह को मिली तो उन्होंने घर पर रहने वाले लोगों को अन्यत्र बसाकर उस जगह पर भव्य मंदिर बनवाया। आज यहां राजा वीरसिंह के परिवार का जरूर कोई पता नहीं है, पर उनकी भक्ति की चर्चा हमेशा बनी रहती है।

औरंगजेब ने किया था प्रतिमा को खंडित

भगवान गैविनाथ की महिमा पर चोट पहुंचाने के नजरिए से मुस्लिम आक्रांता औरंगजेब ने अपनी सेना के माध्यम से गैविनाथ स्वामी की प्रतिमा पर छेनी और हथौड़ी से प्रहार किया था। शिवलिंग पर 5 टांकियां लगाई गई हैं। कहा जाता है जब प्रतिमा पर पहली टांकी लगी तो रक्त की धारा, दूसरे टांकी पर दुग्ध की धारा बहने लगी थी। तीसरी टांकी जैसे ही प्रतिमा पर लगाई गई तो मधुमक्खियां उड़ने लगी। प्रतिमा के पास से निकलने वाली मधुमखियों ने औरंगजेब की सेना को खदेड़कर मंदिर परिसर से बाहर की। उन्हें अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा। भगवान शिव की यह प्रतिमा खंडित जरूर है, पर इसकी शक्ति आज भी अखंडित है। यह खंडित शिवलिंग सदियों से अपने लाखों भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर के पास ही एक प्राचीन सरोवर भी स्थित है, सरोवर के उस पार माता पार्वती का मंदिर तो इस पार गैविनाथ सरकार का मंदिर है। जहां भक्त अपनी मुरादें पूर्ण होने पर भगवान शिव और माता पार्वती के बीच गांठ बंधाई का कार्यक्रम करते हैं। जिसका विशेष धार्मिक महत्व है।

दशकों बाद मिली विकास कार्य को गति

जिले में विकास कार्यों को लेकर बिरसिंहपुर का क्षेत्र काफी पिछड़ा शुरू से ही रहा है। इसके पिछड़े पनका सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में पानी की कमी व पठारी और जंगली भूमि का होना भी है। लेकिन गैविनाथ सरकार की कृपा से न सिर्फ इस क्षेत्र को पहचान मिली है बल्कि अब यहां के विकास कार्यों को भी गति मिली है। 2 करोड़ रुपए की लागत से यहां बने तलाब का सौंदौरियकरण किया जा रहा है। साथ तलाब की सफा-सफाई का कार्य पूरा किया गया।

बिरसिंहपुर के विकास कार्यों को गति देने में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारतीय का विशेष योगदान रहा है। वहीं बीते कुछ वर्ष पहले हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी गैविनाथ धाम के विकास के लिए 2 करोड़ रुपए का विशेष योगदान दिया। पूरे क्षेत्र और प्रदेश से पर्यटक यहां सरलता से पहुंच सकें इसके लिए यहां सड़कों का मजबूत जाल बिछाया गया है।

तरुण चतुर्वेदी, भोपाल

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