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Sunday, December 5, 2021

गौभक्ति ने दिलाया इस मुस्लिम गौपालक को पद्मश्री सम्मान, जानिए कौन हैं मुन्ना मास्टर

Jaipur: एक मुस्लिम गौभक्त को जब पद्मश्री सम्मान मिला तो उसे खुद को भी भरोसा नहीं हुआ। 20 सालों से गौशाला में लगातार गायों की सेवा करना, गाय को चारा खिलाना, गुड़ खिलाना, भजनों के जरिए गाय के प्रति लोगों को जाग्रत करना यही काम मुन्ना मास्टर कर रहे हैं। जयपुर जिले के बगरू के लोगों को ही नही खुद मुंन्ना मास्टर को भी भरोसा नहीं हुआ कि उन्हें पदमश्री सम्मान मिल रहा है।

मुंन्ना ममास्टर की पहचान भजन गायक, भगवान श्रीकृष्ण के भक्त और गोसेवक के रूप में है। ये अपने भजनों के जरिए कवि रसखान की परंपरा का आगे बढ़ा रहे हैं। साथ ही खान श्री श्याम सुरभि वंदना नामक किताब भी लिख चुके हैं। मुंन्ना मास्टर का कहना है कि सरकार ने उन्हें जो सम्मान दिया है ये उनके लिए जिंदगी की सबसे बड़ी सफलता है। मुन्ना मास्टर पिछले 20 वर्षों से गौ सेवा कर रहे है और इनका मानना है कि ये सम्मान सब गौ सेवा के कारण मिला है। वे आगे भी इसी तरह गौ सेवा करते रहेंगे और गौ हत्याओं पर रोक लगाने के लिए जागरूकता अभियान चलाएंगे।

गायों की सेवा के बाद मुंन्ना मास्टर गौशाला में बने मन्दिर में भजन गाते है। भजनों के जरिये लोगो को गौ सेवा के लिए प्रेरित कर रहे है। मुन्ना मास्टर के पिता गफूर खान भी मशहूर शहनाई वादक थे और साहित्य ज्ञाता भी थे साथ ही उन्हें भी गायों को सेवा करना पसंद था।

खान का कहना है कि उनके पिताजी तुलसी की विनयपत्रिका और सूरदास के सूर सागर के भजन गाते थे। बचपन में उनको देखते देखते मुझे भी भजन याद हो गए और गौ माता की सेवा का धर्म उत्पन्न हो गया। और यही कारण है की बगरू के अराध्य देव जुगल दरबार के मंदिर से जुड़े हुए है और वहां नियम से जाते है साथ ही रामदेव गौशाला में गौ माता की सेवा करते है।मुंन्ना मास्टर का कहना है गौ सेवा करना मैं अपना धर्म मानता हुं। लोगों को भी गौसेवा करनी चाहिए। मगर जब गायों को आवारा पशु के रूप के घूमता देखता हूं। कसाई खाने में कटता देखते हैं तो दुख होता है।

मुन्ना मास्टर प्रोफेसर फिरोज खान के पिता हैं, जिनके (BHU) के संस्कृत निकाय में नियुक्ति को लेकर काफी बवाल मचा था। उनका पांच नवंबर को बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए इंटरव्यू हुआ था, जिसके बाद उनकी वहां नियुक्ति की गई थी।

छात्रों के एक वर्ग ने उनकी इस नियुक्ति पर आपत्ति दर्ज कराते हुए विरोध किया था इस विरोध के चलते फिरोज खान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। जिसके बाद उन्होंने संस्कृत विभाग के कला संकाय में जॉइनिंग की।

टीम बेबाक

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