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Thursday, August 18, 2022

Gangotri Assembly: गंगोत्री विधानसभा क्षेत्र, क्या है जाति और जीत का समीकरण, पूरी रिपोर्ट

Uttarakhand: मां गंगा का उद्गम क्षेत्र और करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र रहे गंगोत्री धाम से जुड़ी यह गंगोत्री विधानसभा सीट प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। सबसे ज्यादा जो रोचक बात है वो ये है कि भारत के आजाद होने के बाद जिस पार्टी का प्रत्याशी इस सीट से विजय होता है, सरकार उसी की बनी है। उत्तराखंड के राजनीति में यह मिथ्य अभी भी खूब चल रही है।

गंगोत्री की राजनीतिक इतिहास

1958 में जब देश आजादी के बाद पहली बार आम चुनाव में था तब यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश का अंग था और उत्तरकाशी सीट से कांग्रेस के रामचंद्र उनियाल कांग्रेस से विधायक बने थे और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी। इसके साथ ही यहां से 3 बार कांग्रेस के ही उम्मीदवार कृष्ण सिंह विधायक रहे और तीनों बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। इसके बाद जब उत्तरकाशी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई और कांग्रेस के उम्मीदवार बलदेव सिंह आर्य विधायक बने और फिर से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी।

देश जब आपातकाल से निकला तो राजनीति भी कई स्तर पर बदल चुकी थी। इसी काल के बाद देश में जनता पार्टी का उदय हुआ और उस समय जनता पार्टी के बर्फिया लाल जुवाठा चुनाव जीत गए और प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार बन गई। फिर इस मिथ को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस और बीजेपी हमेशा इस सीट को जीतने के लिए अपनी पूरी तकत झोंक देती है।

सामाजिक समीकरण

गंगोत्री विधानसभा सीट कुल मतदाता
81121

पुरुष मतदाता
43003

महिला मतदाता
40278

ठाकुर
62%
ब्राह्मण
17%
अनुसूचित जाति
19%
अनुसूचित जनजाति
15%
मुस्लिम आबादी
0.5%

2017 में क्या हुआ ?

2017 के विधानसभा चुनाव में यहां के लोगों ने बीजेपी के गोपाल रावत को विधायक चुना और कांग्रेस के विजयपाल सजवाण को हरा दिया। 2017 में गोपाल रावत को 25683 वोट मिले और विजयपाल सजवाण को 16073 वोट। हालांकि गोपाल रावत अप्रैल 2021 को कैंसर की बीमारी की वजह से दुनिया को अलविदा कर दिए।

टीम बेबाक

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