34.1 C
New Delhi
Friday, October 7, 2022

प्राकृतिक सुंदरता और अध्यात्म का अनोखा केंद्र है धारकुंडी

सतना सिर्फ सीमेंट उद्योग के लिए नहीं बल्कि धार्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है। इसलिए सतना को सीमेंट सिटी की जगह रिलीजियस सिटी कहा जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। क्योंकि इसी जिले में तीर्थों का तीर्थ कहे जाने वाला चित्रकूट स्थित है। मातृ शक्ति का केंद्र कहा जाने वाला मां शारदा का मंदिर है। ऐसे कई धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले स्थल सतना नगरी में मौजूद हैं। उन्हीं में से एक है धारकुंडी आश्राम जो, जिला मुख्यालय से महज 60 किमी. की दूरी पर बिरसिंहपुर के वीरपुर गांव के पास स्थित है।

धारकुंडी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्म का एक अनोखा केंद्र है। जो विंध्यांचल पर्वत श्रंखला पर स्थित है। परमहंस सच्चिदानंद महाराज जी ने अपने गुरु परमहंस परमानंद महाराज जी की आसीम कृपा से और अपने तपोबल से इस पूरे वनीय क्षेत्र में आध्यात्म का संचार किया है। इसलिए हर मौसम में इस पुण्य भूमि में यहां क्षेत्रीय तथा प्रांतीय लोगों को आवागमन बना रहता है।

मुख्य बातें

  1. सदियों से धारकुंडी में निकल रही है प्राकृतिक जल धारा, जो बनाती है आश्रम को सुंदर और खास
  2. परमहंस सच्चिदानंद महाराज जी ने यहां के भीषण घने जंगलों में की है कई वर्षों तक तपस्या
  3. मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीचों बीच स्थित है, धारकुंडी आश्रम
  4. हर मौसम में पहुंचते हैं यहां काफी तादत में पर्यटक
  5. क्षेत्र के विकास में धारकुंडी आश्रम का है विशेष योगदान

Bhopal: चारों तरफ घना जंगल है, विंध्य पर्वत की पर्वत श्रृंखलाएं फैली हुई हैं। ऊंची-नीची पहाड़ियों के बीच कई प्राकृतिक झरने व गुफा-कंदराएं हैं। कई किलोमीटर के क्षेत्र में दूर-दूर तक कोई बस्ती नहीं है। सिर्फ जंगल के पशु-पक्षियों की झलक दिखाई और आवाज सुनाई दे रही है। कुछ ऐसा की मन को सुकून और शांति देने वाला नजारा है धारकुंडी के जंगलों का। जहां प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्म का अनोखा केंद्र विकसित किया है, परमहंस सच्चिदानंद महाराज जी ने। जिन्हें भक्तगण स्नेह से धारकुंडी वाले स्वामी जी कहकर पुकारते हैं। धारकुंडी के घने निर्जन जंगल में परहमहंस सच्चिदानंद महाराज जी ने कई वर्षों तक इन कंदराओं और गुफाओं में रहकर साधना की है। आज उन्हीं की साधना और तपोबल का प्रताप है कि धारकुंडी अब आम लोगों के लिए संघन वन्य क्षेत्र के साथ एक मनमोहक पर्यटन स्थल भी बन चुका है। परमहंस सच्चिदानंद महाराज जी के धारकुंडी आश्रम में प्राकृतिक रुप से जल धारा का सतत प्रवाह हो रहा है। यहीं पास में महाराज जी का साधना स्थल भी है। जहां वे पहाड़ पर शिलाओं के बीच स्थित गुफा में तपस्या करते थे। धारकुंडी के घने जंगल जंगली जानवरों और कई दिव्य औषधियों से युक्त भी है।

आश्रम में स्वच्छता और शांति का है विशेष महत्व

स्वच्छ भारत अभियान, ग्रीन इंडिया क्लीन इंडिया जैसे अभियान को लेकर हमारी सरकारें पिछले कुछ वर्षों से काफी सक्रिय है। लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरुक करने के लिए भारत सरकार और स्थानीय सरकारें अपने लाखों के बजट खर्चकर दाव पर लगा देती हैं। लेकिन इसके बाद भी स्वच्छता को लेकर लोगों में संवेदनशीलता नहीं विकसित हो पाती है। वहीं, यदि दूसरी तरफ बात करें तो भारत के ऐसे कई मठ, मंदिर और संस्थान स्वच्छता को लेकर कई दशकों से कार्यरत हैं। ये आश्रम स्वच्छ भारत अभियान, ग्रीन इंडिया क्लीन इंडिया को अपने प्रारंभ काल से ही बल देते आए हैं। कुछ ऐसी ही विशेषता है धारकुंडी आश्रम की। जहां स्वच्छता और शांति को विशेष महत्व दिया जाता है। यहां आश्रम की सफाई कोई सफाई कर्मी नहीं बल्कि खुद आश्रम के संत और महात्मा करते हैं। क्योंकि जहां स्वच्छता होगी वहीं शांति होगी, जहां शांति होगी वहीं मन निर्मल और साधना में लीन होगा। शायद इसीलिए पूरे आश्रम परिसर की नियमित दिन में चारों प्रहर सफाई की जाती है। आश्रम की यह विशेषता आश्रम से जुड़े भक्तों के घर में भी देखी जा सकती है।

जानें क्या है धारकुंडी का अर्थ?

धार तथा कुंडी यानी जल की धारा और जलकुंड। विंध्याचल पर्वत श्रेणियों के दो पर्वत की संधियों से प्रस्फुटित होकर प्रवाहित होने वाली जल की निर्मल धारा यहां एक प्राकृतिक जलकुंड का निर्माण करती है। समुद्र तल से 1050 फुट ऊपर स्थित धारकुंडी में प्रकृति का स्वर्गिक सौंदर्य आध्यात्मिक ऊर्जा का अक्षय स्रोत उपलब्ध कराता है।

योगिराज स्वामी परमानंद जी परमहंस जी के सान्निध्य में सच्चिदानंद जी ने चित्रकूट के अनुसूया आश्रम में करीब 11 वर्ष साधना की। इसके बाद सच्चिदानंद जी महाराज 1956 में यहां आए और अपनी आध्यात्मिक शक्ति से यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को आश्रम के माध्यम से एक सार्थक रूप दिया। उनके आश्रम में अतिथियों के लिए रहने और भोजन की मुफ्त में उत्तम व्यवस्था है। यहां आकर जीवन ठहर सा जाता है। मन को सुकून मिलता है। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का तो कोई जवाब नहीं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है यहां का परमहंस आश्रम। पूज्य सच्चिदानंद जी के अध्यात्म ने धारकुंडी के सौंदर्य की महिमा को दैवीय बना दिया है। जिसका अनुभव प्रकृति प्रेमी व्यक्तियों को जरूर लेना चाहिए।

अघमर्षण कुण्ड

धारकुंडी आश्रम परिसर में ही एक छोटा लेकिन दिव्य जलाशय है। जनश्रुति के अनुसार, यह वही अघमर्षण कुंड है, जहां पाण्डवों के वनवास काल में चित्रकूट प्रवास के दौरान यक्ष युधिष्ठिर संवाद हुआ था। ऋषियों की तपस्या से ऊर्जावान हुई इस धरा में आने पर शांति का अनुभव होता है। यह कुंड सैकड़ों फीट तक गहरा है। अघमर्षण कुंड का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी है। यहां एक ऋषि थे उन्हीं के नाम से प्रसिद्ध यह कुंड अघमर्षण कुंड के नाम से विख्यात है। यह कुंड भूतल से करीब 100 मीटर नीचे हैं और इस स्थान पर पहुंचने के लिए 155 सीढ़ी की यात्रा करनी पड़ती है।

तरुण चतुर्वेदी, भोपाल

SHARE

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

114,247FansLike
138FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles

SHARE