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Wednesday, October 20, 2021

बौद्ध मूल की 30000 मूर्तियों को नष्ट करने से श्रीलंका और पाकिस्तान के रिस्तों में आ सकती है दरार, जाने क्या है पूरा मामला

दिल्लीः हर एक देश के लिए धार्मिक स्थल आस्था का केंद्र होते हैं। चाहे वे फिर देश की सीमा में हो या फिर सीमा से बाहर। क्योंकि आस्था असीमित होती है। इसलिए आस्था को कभी भी सीमा के बंधन में नहीं बांधा जा सकता है। यही वजह है कि आस्था पर जब भी प्रहार होता है तो आस्थावानों को चोंट पहुंचती है। आज इसीलिए पाकिस्तान के स्वात घाटी में बौद्ध विरासत स्थलों, स्तूपों और बुद्ध की मूर्तियों को विध्वंस करने पर श्रीलंका काफी आहत है। यहां चीन की मदद से गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में बनाए जा रहे डायमर-भाषा बांध परियोजना के लिए बौद्ध मूल की 30000 मूर्तियों को नष्ट किया गया है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने व्यक्त की चिंता

बौद्ध विरासत स्थलों को नष्ट किए जाने पर श्रीलंका ने नाराजगी जताई है। इसकी वजह से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों प्रभावित भी हो सकते हैं। श्रीलंका और पाकिस्तान के रिस्तों में आ सकती है दरार आ सकती है। वहीं 2020 में पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में बुद्ध की 1,700 साल पुरानी एक मूर्ति को ध्वस्त कर दिया गया था। मूर्ति विध्वंस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसको लेकर नागरिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की है। हालांकि, कई पाकिस्तानी नागरिकों ने दुर्भाग्यपूर्ण कृत्य का समर्थन भी किया है।

पाकिस्तान सरकार देश में बौद्ध विरासत स्थलों को धार्मिक कट्टरपंथियों से बचाने में विफल

कुछ महीने पहले पाकिस्तानी राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने श्रीलंका के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की बात कही थी। उन्होंने इस्लामाबाद में श्रीलंकाई बौद्ध भिक्षुओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान संबंधों को मजबूत करने के लिए एक धार्मिक पर्यटन पर जोर दिया था। हालांकि, पाकिस्तान सरकार देश में बौद्ध विरासत स्थलों को धार्मिक कट्टरपंथियों से बचाने में विफल रही है। इस घटना ने अफगानिस्तान की बामियान घाटी में 2000 साल पुरानी बुद्ध की दो विशाल मूर्तियों के विनाश की भयानक यादों को ताजा कर दिया है। इस्लाम खबर की रिपोर्ट के अनुसार, यह निश्चित रूप से पाकिस्तान सरकार की धार्मिक पर्यटन को मजबूत करके श्रीलंका के साथ संबंधों का विस्तार करने की योजना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने की चुनौतियां

पाकिस्तान को आतंकी गतिविधियों का केंद्र माना जाता है। इसके कारण पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। अब धार्मिक संरचना के विध्वंस ने न केवल पर्यटकों की संख्या बल्कि राजस्व में भी भारी कमी देखने को मिली है। इस्लामाबाद के लिए पड़ोसी देशों विशेष रूप से बौद्ध-बहुल श्रीलंका के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने की चुनौतियां भी पैदा कर दी हैं। इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के मुस्लिमों सहित सभी कोरोना संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार करने के श्रीलंका सरकार के फैसले में हस्तक्षेप ने स्थानीय बौद्ध आबादी को नाराज कर दिया था।

डेस्क बेबाक

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