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Thursday, August 18, 2022

सिक्कों का ना चलना भारतीय मुद्रा का अपमान कहें या व्यापारियों की मनमर्जी, जानिए MP में सिक्कों की क्या है चाल

आज से 3 वर्ष पहले पूरे मध्यप्रदेश में 1 और 2 रुपए के सिक्के आसानी से सभी जगह चल जाते थे। लेकिन अब मध्यप्रदेश में ऐसा नहीं है। कुछ जिलों को छोड़ दें तो बाकी जगह यह सिक्के बंद हैं। जबलपुर और रीवा संभाग में व्यापारियों और बैंकों के द्वारा इन्हें साफ तौर पर लेने से मना कर दिया जाता है। जिसकी वजह से छात्रों को, आम मजदूरों को व किसानों को कई तरह की आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर व सीहोर जैसे जिलों में सिक्के बिल्कुल उसी क्रम में चल रहे हैं, जैसे पहले चलते थे।

New Delhi: जिन सिक्कों को पाकर पहले बच्चों के चेहरे खिलते थे आज उन सिक्कों की खनक सुनते ही उनके चेहरों में उदासी सी छा जाती है। जिसकी वजह इन सिक्कों का ना चलना है। पहले 1 और 2 रुपए के सिक्के लेकर गांव और कस्बों में छोटे-छोटे बच्चे दुकान से अपनी मनचाही चॉकलेट खरीद पाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है, मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में सिक्कों का अस्तित्व खत्म हो चुका है। जिनमें से जबलपुर व रीवा संभाग के क्षेत्र प्राथमिकता में है। वहीं भोपाल, मालवा और मध्य भारत क्षेत्र में सिक्के पूर्व की तरह चल रहे हैं। जबलपुर व रीवा संभाग में व्यापारियों के द्वारा सिक्के देने पर ग्राहकों को कहा जाता है, हम क्या करेंगे इनका। हमारे पास कई बोरियों में सिक्के पड़े हैं,कोई नहीं ले रहा है। बैंक वाले भी मनाकर रहे हैं।इसलिए हम इन सिक्कों को लेने से मना कर देते हैं।

सिक्के स्वीकार न करने पर हो सकती है ये कार्रवाई

अग्रणी बैंक प्रबंधक सुभाष बशु द्वारा बीते दिन बताया गया कि वर्तमान में 50 पैसे, 1 रूपए, 2 रूपए, 5 रूपए और 10 रूपए मूल्य के सिक्के जारी किए जा रहे हैं। ये सभी सिक्के वैध मुद्रा हैं। इनमें लेन-देन करना अनिवार्य है। इन सिक्कों में लेन-देन करें, सिक्काकरण अधिनियम 2011 की धारा 06 में प्रदत्त अधिकार के अंतर्गत जारी सिक्के भुगतान के लिए वैध मुद्रा है। वशर्ते की सिक्कों को विरूपित न किया गया हो और सिक्के का वजन निर्धारित वजन से कम न हो। ऐसे सिक्के वैध मुद्रा की श्रेणी में आते हैं। अगर सिक्के को वैध मानते हुए लेन-देन नहीं किया जाता तो सिक्काकरण अधिनियम 2011 की धारा 06 के प्रावधानों के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है।
इस संबंध में सभी संबंधितों को सूचित किया जाता है कि सिक्के वैध मुद्रा हैं, दुकानदार व व्यवसायी ग्राहकों से स्वीकार करें। सिक्कों को स्वीकार न करना भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों के अनुसार कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए दुकानदारों एवं व्यवासायिओं को सलाह दी जाती है कि 1, 2 एवं 5 रूपए के सिक्के लेन-देन करते समय स्वीकार करें। अन्यथा संबंधित के विरूद्ध दण्डनीय कार्यवाही की जा सकती है। यह संदेश मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग की तरफ से जारी किया गया है।

स्टूडेंट्स को हो रही है समस्याएं

सतना की छात्रा और स्टूडेंट लीडर वसुंधरा सिंह का कहना है कि सिक्के ना चलने की वजह से सबसे ज्यादा समस्याएं स्टूडेंट्स को हो रही है। उनके जेब पर भार अधिक पड़ा है। 1 या 2 रुपए के सिक्के ना चलने की वजह से स्टूडेंट्स के बचे हुए पैसे वापस नहीं आ पाते हैं। कभी-कभी तो 5 रुपए की जगह 10 रूपए भी खर्च करने पड़ते हैं। सरकार को इस समस्याओं को जल्द दूर करना चाहिए। सिक्कों का चलन पूर्वत होना चाहिए। सतना में करीब 2 सालों से सिक्के बंद हैं।

जबलपुर में सिक्के नहीं चलते, कोलकाता गया था, वहां चल रहे हैं

जबलपुर के युवा अनिल का कहना है कि अभी मैं दो-तीन दिन पहले कोलकाता से लौटकर आया हूं। वहां देखा की एक और 2 रूपए के सिक्के चल रहे हैं। यहां सिक्के लेने और देने वालों को दोनों में से किसी को दिक्कत नहीं हो रही है। जबकि हमारे खुद के शहर में सिक्कों का चलन बंद है। इससे हर एक वर्ग को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। समझ में नहीं आता की सिक्कों का चलन यहां क्यों बंद किया जा रहा है?

मुझे ऐसी कोई दिक्कत नहीं हुई सिक्के यहां तो चल रहे हैं

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाली प्रज्ञा चतुर्वेदी का कहना है कि मुझे ऐसी कोई दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ रहा है। हमारे भोपाल में सिक्के चल रहे हैं। अभी मैं ग्वालियर गई थी वहां भी सिक्के चलते हैं। इंदौर, उज्जैन और सीहोर में भी सभी लोग आसानी से सिक्कों से लेनदेन करते हैं। यदि मध्य प्रदेश के दूसरे जिलों में इनका चलन बंद है, तो इसे जल्द शुरू करना चाहिए।

सुनिए सतना कलेक्टर के बोल

जब इस मामले में सतना जिले के कलेक्टर अजय कटेसरिया के लैंडलाइन नंबर पर बात की गई और सिक्कों को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा सतना में सिक्के चलते हैं। यहां सिक्के किसी भी प्रकार से बंद नहीं हैं। लेकिन जब जिले के लोगों की समस्याएं उनके सामने रखी गई तो सवाल पर फंसता देख कर कलेक्टर बोले मैं अभी व्यस्त हूं। मेरे पास समय नहीं है। मैं बाद में बात करता हूं और फोन को कट कर दिए।

तरुण चतुर्वेदी, भोपाल

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