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Sunday, January 16, 2022

बेसिक शिक्षा विभाग ने नियमों के विरुद्ध किया BEO का ट्रान्सफर

  • बेसिक शिक्षा विभाग ने नियमों के विरुद्ध किया है बीईओ का स्थानांतरण
  • बीईओ का नियमों के विरुद्ध शासनादेशों को ताक पर रखकर किया गया है स्थानांतरण
  • अपर शिक्षा निदेशक की तरफ से पूर्व में किए गए तबादले को हाईकोर्ट कर चुका है निरस्त

Lucknow: बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से नियमों के विरूद्ध शासनादेशों को ताख पर रखकर स्थानांतरण किया गया है। बीईओ के स्थानांतरण में किस तरह से धांधली की गई है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विशेष सचिव आरबी सिंह बीईओ के पद को समूह ‘ख’ का बता रहे हैं और स्थानांतरण अपर शिक्षा निदेशक द्वारा किया जा रहा है।

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की तरफ से नियमों को ताख पर रखकर विभाग की तरफ से ऐसा पहली बार नहीं किया गया है, इससे पहले भी खण्ड शिक्षा अधिकारी मोईन अहमद का स्थानांतरण किया गया था, तब हाईकोर्ट की तरफ से तबादले को निरस्त कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने मोईन अहमद का स्थानांतरण अपर शिक्षा निदेशक की तरफ से किया गया था और कोर्ट ने इसी आधार पर निरस्त कर दिया था कि उनका स्थानांतरण विभागाध्यक्ष की तरफ से नहीं किया गया है।

विभागाध्यक्ष ही खण्ड शिक्षा अधिकारियों का तबादला करने के लिए नियमों के हिसाब से अधिकृत है। खण्ड शिक्षा अधिकारियों को स्थानांतरण शिक्षा निदेशक की तरफ से ही किया जा सकता है। लेकिन आचार संहिता की आड़ में बड़ा ‘खेला’ करते हुए बैकडेट में अपर शिक्षा निदेशक ललिता प्रदीप की तरफ से किया गया है। जबकि स्थानांतरण शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह की तरफ से करना चाहिए था। बीईओ का स्थानांतरण जिस तरह से विभाग ने किया है, उससे साफ है कि विभाग के बड़े अधिकारी खण्ड शिक्षाधिकारियों के स्तानांतरण में शामिल है।

विशेष सचिव ने बताया समूह ‘ख’ का पद

बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव आरबी सिंह की तरफ से 12 जनवरी को एक पत्र निर्वाचन आयोग को भेजा गया है। इसमें उनकी तरफ से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के साथ ही खण्ड शिक्षा अधिकारी की तरफ से समूह ख का पद बताया गया है। उन्होंने बताया है कि शामली की बेसिक शिक्षाधिकारी गीता वर्मा का स्थानांतरण 13 अक्टूबर को जारी किए गए पत्र के हिसाब से पूर्व में किया गया जा चुका है और वहीं वर्तमान में 439 खण्ड शिक्षाधिकारियों का तबादला किया गया है। शासन की तरफ से खण्ड शिक्षा अधिकारियों के पद को समूह ‘ख’ का बताया गया था, लेकिन समूह ‘ग’ का पद बताते हुए पूर्व में 12 मार्च को खण्ड शिक्षाधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिया गया था। खण्ड शिक्षाधिकारियों को समूह ‘ग’ के तहत नियुक्ति पत्र दिए जाने पर खण्ड शिक्षाधिकारी संघ की तरफ से आपत्ति भी जारी की गई थी। संघ ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी, तब जाकर बाद में विभाग ने अपनी गलती मानी थी।

निर्वाचन आयोग को गलत सूचना दे रहा विभाग

विशेष सचिव आरबी सिंह की तरफ से निर्वाचन आयोग को किस तरह से गलत बताया है कि इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक ही जिला और मंडल में तीन साल पूरा कर चुके अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। जबकि अपर शिक्षा निदेशक की तरफ से एक ही मंडल में दर्जनों खण्ड शिक्षाधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। इस तरह विभााग की तरफ से निर्वाचन आयोग को भी गलत सूचना दी जा रही है। एक ही मंडल में सैकड़ों खण्ड शिक्षाधिकारियों को भेजा गया है। विभाग की तरफ से जिस तरह से गलत सूचना दी जा रही है, उससे साफ है कि विभाग की तरफ से किए गए ‘खेला’ में बहुत ही बड़े अधिकारी शामिल है।

शासन के बिना अनुमोदन के किया है स्थानांतरण

खण्ड शिक्षा अधिकारियों के स्थानांतरण में किस तरह से धांधली की गई है, इसकी बानगी सिर्फ विभागाध्यक्ष की तरफ से स्थानांतरण न किया जाना है, बल्कि इसके अलावा विभाग की तरफ से शासन से अनुमोदन भी नहीं लेना है। नियमों के हिसाब से अगर विभाग में 20 प्रतिशत से अधिक स्थानांतरण किया जाता है तो शासन से अनुमति ली जाती है। लेकिन विभाग की तरफ से बैकडेट में ही स्थानांतरण किया गया है कि इसमें किसी भी तरह से शासन की अनुमति नहीं ली गई है। अब समसे मजे की बात यह है कि अधिकतर जिलों में बीईओ को जिला निर्वाचन अधिकारी की तरफ से मास्टर ट्रेनर और एआरओ की जिम्मेदारी दे दी गई है। अब उन्हें यह जिम्मेदारी देते हुए क्षेत्र भी बांट दिया गया है। अगर विभाग या निर्वाचन आयोग की तरफ से स्थानांतरण किया जाता है तो फिर कई जिलों में निर्वाचन कार्यों में भी इसका प्रभाव पड़ेगा।

जिलों को नौ जनवरी को भेजी गई सूचना

बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से बैकडेट में किए गए स्थानांतरण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभाग की तरफ से बेसिक शिक्षा अधिकारियों को नौ जनवरी को निदेशालय से एक पत्र भेजा गया है। निदेशालय की तरफ से एक पत्र जारी किया गया है, इसमें डिस्पैच नंबर सात जनवरी को दर्शाया जा रहा है। अगर विभाग की तरफ से सात जनवरी को स्थानांतरण किया गया है तो फिर आखिर ई-मेल नौ जनवरी को क्यों भेजी गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि विभाग की तरफ से आचार संहिता लागू होने के बाद में ही स्थानांतरण किया गया है।

रिपोर्ट- प्रवेश यादव

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