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Wednesday, October 20, 2021

जानिए क्यों तकलीफ में होने के बाद भी कुछ लोग नहीं कह पाते अपने मन की बात

MP-PANNA:ज्यादातर लोग अच्छा बुरा कुछ भी कहने में नहीं  हिचकिचाते , वो आराम से अपनी भावनाएं लोगों तक पहुंचाने में सक्षम होते हैं। वहीं कुछ  चुनिंदा लोग चाह कर भी अपने मन की बातें किसी से नहीं कह पाते। घर वालों से, दोस्तों से, भाई बहिनों से भी नहीं , ऐसे लोगों को छोटी से छोटी बात बताने में भी हिचकिचाहट होती है, फिर तकलीफ या क्या बात उन्हें परेशान  कर  रही है। उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है।

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कुछ लोग बचपन से ही ऐसे होते हैं जिन्हे अपनी बातें कहना या बताना नहीं आता , छोटे  बच्चे कई बार चोट लगने की बात , दोस्त से झगड़े की  बात या पढ़ाई में दिक्कत की बात भी नहीं बता पाते और ये आदत बड़े तक रहती है।

भावुक होना

ऐसे लोग जो बहुत भावुक होते हैं , क्योंकि इनके मन में बहुत सारी बातें चल रही होतीं हैं इसलिए ये असल में क्या कहना चाहतें हैं समझना कठिन हो जाता है ऐसे लोग दिमाग में चल रही  बातों का 5 या 10% ही सामने वाले को बता पाते हैं।

बचपन की कोई घटना 

अक्सर ऐसे लोग जो जिनके बचपन में कोई ऐसी घटना हुई हो जिससे उनके दिल को गहरी चोट पहुंची हो वो बड़े होकर अपनी भावनाएं साझा नहीं कर पाते , जैसे किसी अपने की मौत का सदमा,किसी तरह का इलज़ाम झेलना , बिना गलती के दोषी ठहराए जाना , क्योंकि बचपन में मन बहुत नाजुक होता है  ऐसे में इस तरह की कोई भी छोटी बड़ी  घटना पूरी उम्र के लिए असर डाल सकती है।

किसी बुरे रिश्ते में होना

कोई अगर ऐसे दोस्ती या प्यार के रिश्ते में रहा हो जहां उसकी भावनाओं की क़द्र ना की गयी हो , या अपने मन की बात कहने के बाद भी बार बार उसे गलत समझा गया हो , ऐसे में इंसान हमेशा के लिए खुद की बात किसी और को समझाने में कमज़ोर हो जाता है , कई बार चाहते हुए 
भी ऐसे लोग हिम्मत नहीं जुटा पाते अपने दिल की बात कहने की , उसे हमेशा यही डर रहता है कि उसकी बात को समझा नहीं जायेगा।

आत्म विश्वास की कमी 

 कई ऐसे लोग जो स्कूल ,  कॉलेज या दफ्तर में अपने दोस्तों के बीच या रिश्तेदारों के बीच मजाक का विषय रहें हों , या जिनके साथ किसी  तरह का उत्पीड़न हुआ हो , ऐसे लोगों में आत्मविश्वास की कमी आ जाती है और वो अपनी बातों को कहने में  संकोच करने लगते हैं।

अगर आपके आसपास भी कोई ऐसा है तो उनकी मदद कैसे करें 

ऐसे लोग कई बार पूरी बात ना बता पाने के कारन गलत समझ लिए जाते हैं , तो उनकी छोटी सी भी बात को समझने की कोशिश करें उन्हें यकीन दिलाएं कि उन्हें गलत नहीं समझा जाएगा।जब उन्हें  ये यकीन हो जायेगा कि  कोई उनकी बात को समझ रहा है तब  वो बातें बताने में हिचकिचाना बंद कर देंगे। ऐसे हो सकता है वो जिस तरीके से अपनी बात कहें आपको वो बचकानी या मामूली बात लगे पर उनके लिए ये गंभीर बात हो सकती है।

सब्र से काम लें , ऐसे लोग जो अपने दिल की बातें नहीं बता पाते , पहले से ही पीड़ाओं में होते हैं ,परेशान होते हैं , अंदर ही अंदर घुट रहे होते हैं  पिछली कई बातों के लिए , ऐसे में वो कई बार ऐसे शब्द या वाक्य बोलते हैं  जिनका कोई अर्थ नहीं निकलता हो या जिनसे आपको  गुस्सा आए ऐसे में थोड़ा सब्र रखें चिल्लाने या गुस्सा  करने की बजाय उन्हें उनकी बात ख़त्म करने दें। बात का माध्यम चुनें , कई लोग बोल कर नहीं बता पाते वो लिखकर बताने की कोशिश करते हैं , चैट , लेटर , मेल या कोई भी ऐसा माध्यम जहां लिखकर बात की जा सकती वो  वो उसमे सहज महसूस करते हैं , तो ऐसे में आप उनकी बातें पढ़कर उनसे बातें कर सकते हैं, उन्हें समझाएं कि  वो लिखकर आप तक अपनी बात  पहुंचाएं।   अगर कोई ऐसा व्यक्ति जो मन की बात बताने में सक्षम नहीं है फिर भी आपसे किसी मुद्दे पर बात करने की कोशिश कर रहा है , 
या अपना कोई शक दूर करने की कोशिश कर रहा है तो  उनकी किसी भी बात को अधूरा  ना छोड़े, उनसे उस मुद्दे पर तब तक बात करने की कोशिश करें जब तक उनका मन हल्का  ना हो जाये या बात किसी अंतिम पड़ाव तक ना पहुंच जाए, इससे आने वाले दिनों में वो इस बात को लेकर दुबारा कभी परेशान नहीं होंगें।

(यह  सिर्फ  निजी  अनुभव और पहचान के लोगों से मिले सुझावों  के आधार पर लिखा गया लेख हैं)

   निधि खरे, पन्ना

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