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भीड़ का अंधा इंसाफ, बच्चा चोर कह कर दी ऐसी सजा की रूह कांप जाए

भीड़ का अंधा इंसाफ, बच्चा चोर कह कर दी ऐसी सजा की रूह कांप जाए

झारखंड, सरायकेला

झारखंड के सरायकेला में बच्चा चोरी के आरोप में गुरुवार को 14 गांव के लोगों ने चार लोगों की बेरहमी से पीट-पीट कर हत्या कर दी। ग्रामीणों पर गुस्सा इस कदर हावी था कि पिटते हुए लोगों को बचाने पहुंचे पुलिसकर्मियों पर भी लोगों ने हमला कर दिया। और पुलिस वाले कम तादाद में होने की वजह से भीड़ के सामने लाचार हो गए।

घटना सरायकेला जिले के राजनगर थाने की है। मृतकों की पहचान घाटशिला के फूलपाल निवासी मो. सज्जाद उर्फ सज्जू, मो. सिराजऔर मो. अलीम के रूप में की गई है। सभी मृतक पसु व्यापारी थे। पुलिस ने तीन लोगों की मरने की पुष्टि की है।

मामले को काबू में करने पहुंचे राजनगर थाना प्रभारी टीपी कुशवाहा व सिपाही सार्जन सोरेन सहत कई जवानों पर भीड़ ने हमला कर दिया जसमें सभी बुरी तरह घायल हुए हैं। साथ ही भीड़ ने पुलिस की गाड़ियों में भी आग लगा दी।

क्या है पूरा मामला
ग्रामीणों को सूचना मिली थी कि कुछ लोग गाड़ियों में बच्चों की चोरी कर उन्हें ले कर जा रहे हैं। इसके बाद चाईबासा के मुख्य मार्ग पर गोविंदपुर से गांजिया बराज और बागबेड़ा जाने वाली सड़क पर बौंगा डांडू पहाड़ गांव के पास गांववालों ने घेराव कर दिया। गाडि़यों को पकड़ने का प्रयास किया लेकिन वो हाथ से निकल गए। फिर 14 गांव के लोगों ने तीर-धनुष, लाठी-डंडे से लैस होकर शोभापुर गांव को घेर लिया। ग्रामीणों क सूचना मिली थी कि गांव के मुरतजा अंसारी ने आरोपियों को पनाह दे रखी थी। जब मुरतजा ने इस बात से इंकार कया तो बीड़ बेकाबू हो गई और घरों में घुसकर तोड़फोड़ करने लगी।

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वहीं, जब एसडीओ व डीएसपी पुलिस बल के साथ सुबह 10 बजे शोभापुर पहुंचे तो ग्रामीण नईम को बच्चा चोरी के आरोप में पीट रहे थे। वह बुरी तरह लहुलुहान हो चुका था। नईम अपनी जान की भीख मांगता रहा लेकिन उसकी फरियाद कोई सुनने वाला नहीं था। पीटाई की वजह से वह स कदर लहुलुहान हो चुका था कि ठीक से हाथ तक नहीं जोड़ पा रहा था। पुलिस ने लाठीचार्ज करने के बाद किसी तरह उसे भीड़ से निकाला लेकिन अस्पताल ले जाते वक्त उसने बीच रास्ते में ही दम तो़ड़ दिया।

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हालांकि ये पहला मामला नहीं है जब भीड़ ने अपना इंसाफ खुद ही किया हो। इससे पहले भी 1 महीने के भीतर ये 5वीं बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर प्रशासन के होते हुए लोगों को कानून को हाथ में लेने का अधिकार कैसे मिलता है? आखिर एक तरह की घटना बार-बार होने के बावजूद प्रशासन कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही? अगर यही सिलसिला चलता रहा तो आम जनता ही अपना इंसाफ करेगी फिर पुलिस-प्रशासन की क्या जरूरत है?

टीम बेबाक

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