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रहमत का महीना है रमजान, इसी माह में हुआ था कुरान शरीफ का अवतरण

रहमत का महीना है रमजान, इसी माह में हुआ था कुरान शरीफ का अवतरण

नई दिल्ली: मई में दो धर्मों के प्रमुख त्योहार एक साथ शुरू हो रहे हैं। तीन साल बाद हिंदुओं का पुरुषोत्तम मास की शुरुआत हो रही है तो चांद दिखने के साथ ही बुधवार शाम यानी 16 मई यानी से मुस्लिमों का पवित्र माह रमजान शुरू हो चुका है। इस दौरान मस्जिदों में नमाज पढ़ने को भीड़ रहेगी और नमाज के साथ रोजे रखकर दुआएं मांगी जाएंगी। यह 16 मई से शुरू होकर गुरुवार 14 जून तक होगा।

बृहस्पतिवार को पहला रोजा रखा गया। रोजा होगा। जबकि चांद रात पर मुस्लिम इलाकों में खास चहल-पहल देखी गई। मस्जिदों में तरावीह (विशेष नमाज) का दौर शुरू हो गया। इसके अलावा लोगों ने आतिशबाजी की और एक दूसरे को गले लगाकर रमजान की मुबारकबाद दी।

रहमत और बरकत का महीना है रमजान

रमजान का महीना रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। इसके सिवा ये महीना पूरे मानव जाति को प्रेम भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देता है। इस महीने में बंदा अपनी इबादत के जरिए अल्लाह के करीब जा सकता है। इसी महीने में कुरान पाक नाजिल हुआ। इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाते हैं। ऐसा माना जाता है कि माह-ए-रमजान नेकी कमाने का महीना है। रमजान में हर नेक कामों का पुण्यफल 70 गुना मिलता है। रोजों की पाबंदी करें। अपने गुनाहों की माफी मांगें। अल्लाह की दी हुई छूट का फायदा न उठाएं।

जन्नत के खुल जाते हैं दरवाजे
इस पाक माह में दोज़ख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत की राह खुल जाती है। रोजा अच्छी जिंदगी जीने का प्रशिक्षण है जिसमें इबादत कर खुदा की राह पर चलने वाले इंसान का जमीर रोजेदार को एक नेक इंसान के व्यक्तित्व के लिए जरूरी हर बात की तरबियत देता है। पूरी दुनिया की कहानी भूख, प्यास और इंसानी ख्वाहिशों के गिर्द घूमती है और रोजा इन तीनों चीजों पर नियंत्रण रखने की साधना है। रमजान का महीना तमाम इंसानों के दुख-दर्द और भूख-प्यास को समझने का महीना है ताकि रोजेदारों में भले-बुरे को समझने की सलाहियत पैदा हो।

रोजे का असल मकसद भूखा रहना नहीं अपनी नफ्स (इच्छाओं) पर काबू पाना है। रोजे के दौरान गीबत, झूठ, लड़ाई आदि बुरे कामों से बचना चाहिए। अल्लाह की खूब इबादत करनी चाहिए और गरीबों की मदद करनी चाहिए।

इसी माह में कुरान शरीफ का हुआ था अवतरण
दरअसल, साल में 11 महीने तक इंसान दुनियादारी की उलझनों में में फंसा रहता है, लिहाजा अल्लाह ने रमजान का महीना आदर्श जीवनशैली के लिए तय किया है। रमजान का उद्देश्य साधन सम्पन्न लोगों को भी भूख-प्यास का एहसास कराकर पूरी कौम को अल्लाह के करीब लाकर नेक राह पर डालना है। साथ ही यह महीना इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद का मूल्यांकन कर सुधार करने का मौका भी देता है। रमजान का महीना इसलिए भी अहम है क्योंकि अल्लाह ने इसी माह में हिदायत की सबसे बड़ी किताब यानी कुरान शरीफ का दुनिया में अवतरण शुरू किया था।

इस महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है
रहमत और बरकत के नजरिए से रमजान के महीने को तीन हिस्सों (अशरों) में बांटा गया है। इस महीने के पहले 10 दिनों में अल्लाह अपने रोजेदार बंदों पर रहमतों की बारिश करता है। दूसरे अशरे में अल्लाह रोजेदारों के गुनाह माफ करता है और तीसरा अशरा दोज़ख की आग से निजात पाने की साधना को समर्पित किया गया है।

इस बार सभी रोजे 15 घंटे या उससे अधिक के होंगे
इस बार सभी रोजे 15 घंटे या इससे अधिक के होंगे। रोजे 915 मिनट से 942 मिनट के बीच होंगे। आखिरी रोजा सबसे बड़ा होगा। जो सुबह 3:40 से शुरू होकर शाम को 7:22 तक चलेगा। बृहस्पतिवार से माह-ए-रमजान का आगाज होने पर इस बार पांच जुमे पडे़ंगे। दूसरे रोजे को ही पहला जुमा होगा। जबकि 9वें रोजे, 16वें रोजे, 23वें रोजे और 30वें रोजे को भी जुमा है।

टीम बेबाक

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