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घुमंतु समाज के लोगों ने एक जाति होने का किया आवाह्न

घुमंतु समाज के लोगों ने एक जाति होने का किया आवाह्न

आज के दौर में जहां लोग एक दूसरे से दूर हो रहे हैं। रंजिश में लोग, लोगों की हत्या तक कर रहे हैं। संबंध टूट रहा है। समाज बंट रहा है और परिवार में मतभेद से रिश्तों में दरार पड़ रही है। वहां वो लोग एक होने की बात कर रहे है, जिनका ना कोई ठौर है ना कोई ठिकाना। जिंदगी दर-ब-दर कट रही है।

आज विमुक्त और घुमंतु समाज के लोगों ने एक होने के लिए एक सम्मेलन का आयोजन किया था, जिसका मुख्य उद्धेश्य विमुक्त और घुमंतु के विभिन्न जातियों को एक जाति में बांधना था। इस सम्मेलन में भेड़कुट, सांसी और मीणा जाति के लोग उपस्थित हुए। सम्मेलन में इन लोगों ने भारत में रहने वाले हर हिस्से के घुमंतु और विमुक्त जातियों को एक होने का आवाह्न किया।

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इस सम्मेलन में हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, पुणे, मुंबई और गुजरात से भांतु, भेड़कुट और सांसी आदि समाज के लोगों ने अपने-अपने विचार मंच पर रखें। इन सब जातियों ने मिलकर एक जाति होने के लिए सहमति जताई।

इन लोगों ने अपने समाज की कमजोर शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया और समाज को शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा देना पर भी जोर दिया। शिक्षा के क्षेत्र को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए राजस्थान प्रदेश के बारमेड़ जिले में कॉलेज खोलने का भी प्रस्ताव रखा। साथ ही देश में चल रहे स्वच्छता अभियान में अपनी सहभागिता के लिए सभी को एक होने की गुजारिश की।

रायसिंह नगर के गंगानगर जिला राजस्थान में आयोजित इस सम्मेलन में राजस्थान के पूर्व मंत्री गोपाल के सावत, घुमंतु बोर्ड के चेयरमैन, भांतु एवं भेंड़कुट समाज के अध्यक्ष सुनील मलिक, पुणे के कोषाध्यक्ष श्री रमेश राही, राजस्थान के अध्यक्ष चतराराम देशबंधु उपस्थित रहें। यह सम्मेलन ‘शाह रौशन महात्मा जी’ के अध्यक्षता में की गई। इस सम्मेलन की समाप्ति पर ‘संत शाह रौशन जी’ ने अलग-अलग राज्यों से आए सभी लोगों को सम्मनित भी किया।

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बिखरते और टूटते रिश्तों के इस दौर में घुमंतु समाज के लोगों ने एतिहासिक कदम उठाया है। अगर ऐसा होता है तो अपने आप में ये एक अद्भुत और अकाल्पनिय कदम साबित होगा।

टीम बेबाक

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