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गाँव ने बुलाया है

गाँव ने बुलाया है

मेरे गाँव ने मुझे बुलाया है
सपनों में बहुत रुलाया है…

कांक्रीट के इस जंगल में
कौन मुझे ले आया है?
अब दम घुटता है मेरा
यही हाल तेरा पाया है
खो गया मेरा ही साया है
शहर की गज़ब माया है

मेरे गाँव ने मुझे बुलाया है
सपनों में बहुत रुलाया है…

मैं गाँव जाना चाहता हूँ
याद आती बरगद की वो छाया है
अब दिल रहता है दुखी
जबकि खुशी का हर गीत मैंने गया है
गाँव के कण-कण से
कोसों दूर खुद को पाया है
मेरे गाँव ने मुझे बुलाया है
सपनों में बहुत रुलाया है…

लेखक मनीष कपिल
लेखक पत्रकार हैं

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