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वो ठंड में ठिठूर कर मर जाते हैं…

वो ठंड में ठिठूर कर मर जाते हैं…

तुम बड़े होटलों में खाते हो
वो सड़क किनारे खाते हैं।।

तुम फैशन में नए नए कपड़े हर दूजे दिन ले आते हो
वो तन ढंकने के लिए कतरन बटोर लाते है।।

तुम खुद की ट्रेवल विश पूरी करने दूर इलाके तक घूम के आते हो..
वो सर छुपाने की जगह के लिए मिलों नंगे पैर चलते जाते हैं।।

तुम अपनी अय्याशियों में रम जाते हो
वो मजबूरियों में जकड़ जाते हैं।।

तुम कोई जश्न मनाने रात रात भर डिस्क में बिताते हो
वो किसी पेड़ के नीचे ठण्ड से ठिठुर कर मर जाते हैं।।

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निधि खरे
(लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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