26.1 C
New Delhi
Wednesday, October 20, 2021

वायुरोगों की रामबाण औषधि है हनुमान मंत्र, हनुमानबाहुक के तीन पाठ मिटा देते हैं वातरोग

New Delhi: कलयुग में पवनपुत्र हनुमान ग्राम-ग्राम में, घर-घर में पूजे जाते हैं। सच्चे, श्रद्धावान मनुष्य के कष्टों का निवारण करने वाले, उनके समान उपकारी व दयालु कोई दूसरे देव नहीं हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी की आराधना से वातरोगों यानी वायुरोगों का नाश होता है। जी हां, आज हम आपको इससे जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

सात चिरंजीवियों में से एक हैं पवनपुत्र हनुमान

सीता जी द्वारा दिए गए वरदान ‘अजर अमर गुननिधि सुत होहू’ और आयुर्वेद के जानकार होने से हनुमान जी ने अपने को चिरंजीवी बना लिया है। वायुदेव के मानस पुत्र होने के कारण हनुमान जी का वायु से गहरा सम्बन्ध है। वे वायुनन्दन, पवनतनय, पवन पुत्र, वातात्मज और मारुति नाम से जाने जाते हैं। इसलिए हनुमान जी की आराधना से वातरोगों (वायुरोगों) का नाश होता है।

महर्षि चरक ने कफ, पित्त और वायु दोषों में वायु को ही बलवान और प्रधान दोष माना है। पित्त, कफ, मल और धातु ये सब पंगु (परतन्त्र) हैं। इनको वायु जहां ले जाता है वहीं ये बादल के समान चले जाते हैं। अधिकांश रोग वायु कुपित होने से ही उत्पन्न होते हैं।

प्राण, अपान, समान, उदान, व्यान, नाग, कूर्म, कृकर, देवदत्त, और धनंजय- ये दस प्रकार के प्राणवायु हैं। शास्त्रों में आत्मा सहित इन दस वायु को एकादश रूद्र कहा गया है। इन वायुओं पर जो विजय प्राप्त कर लेता है, उसे ही अष्टसिद्धियां प्राप्त होती हैं। हनुमानजी अष्टसिद्धियों के दाता हैं।

वायुरोगों के नाश के लिए हनुमान जी की पूजा विधि और मंत्र

-सबसे पहले किसी शुद्ध स्थान पर हनुमान जी की तस्वीर के सामने पूर्व की ओर मुख करके आसन पर बैठ जाएं।

-चंदन, चावल, फूल, धूप-दीप व नैवेद्य से हनुमान जी का पूजन करें। हनुमान जी को शुद्ध घी में घर पर बनाया हुआ चूरमा प्रसाद चढ़ाना चाहिए। यदि रोज चूरमा का भोग न लगा सकें तो मंगलवार को अवश्य भोग लगाना चाहिए।

-हनुमान जी के चित्र के सामने शुद्ध घी का ही दीप जलाना चाहिए।

वायुरोग के नाश के लिए जो मंत्र बताए जा रहे हैं, उनमें से अपनी सुविधानुसार जो आसान लगे, वह मंत्र जाप कर सकते हैं

पहला मंत्र है

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

इस मंत्र का ज्यादा-से-ज्यादा जप करने का प्रयत्न करना चाहिए। रात-दिन मानसिक जप भी कर सकते हैं या प्रतिदिन केवल रात में भोजन का नियम लेकर एक सौ आठ बार जप करें तो मनुष्य छोटे-मोटे रोगों से छूट जाता है।

दूसरा मंत्र है

हनुमान अंजनीसूनो वायुपुत्र महाबल।
अकस्मादागतोत्पातं नाशयाशु नमोऽस्तु ते।।

इस मंत्र का जप दो प्रकार से कर सकते हैं। पहला, अनुष्ठान विधि से जप कर सकते हैं- इसमें 11 दिनों तक रोजाना 3 हजार माला का जप होना चाहिए। उसके बाद दशांश जप या हवन करके ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए, इससे शीघ्र ही रोग नष्ट हो जाता है।

दूसरी विधि है कि सभी अवस्थाओं में चलते-फिरते, काम करते हुए, जब भी अवसर प्राप्त हो, इस मंत्र का तब तक मानसिक जप करना चाहिए, जब तक की रोग शान्त न हो जाए।

‘हनुमानबाहुक’ के तीन पाठ मिटा देते हैं वातरोग

तुलसीदास जी की बाहुओं में वायु-प्रकोप से भयंकर पीड़ा थी। उसी समय उन्होंने ‘हनुमानबाहुक’ की रचना की, जिसके फलस्वरूप उन्हें वायु-प्रकोप से मुक्ति मिल गयी। ऐसी मान्यता है कि औषधि सेवन से जो वात कष्ट दूर नहीं हो पाता, उसे हनुमानबाहुक के केवल तीन पाठ पूरी तरह से दूर कर देते हैं। इतना ही नहीं ‘हनुमानबाहुक’ के ग्यारह हजार एक सौ आठ (11,108) पाठ करने से असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाता है।

समस्त मनोरथों को पूर्ण कर अभीष्ट फलदाता होने से ‘हनुमानबाहुक’ का पाठ नित्य किया जा सकता है। स्नान करके शुद्ध आसन पर बैठकर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्रपट पर गुग्गुल का धूप निवेदन करें। बेसन के पांच लड्डू या पांच फल या पंचमेवा का नैवेद्य (भोग) अर्पणकर एकाग्रमन से हनुमानजी का ध्यान करते हुए ‘हनुमानबाहुक’ का नित्य पाठ करने पर वायु सम्बन्धी सभी रोगों का शमन हो जाता है।

दै गूगुल की धूप हमेशा।
करै पाठ तन मिटै कलेषा।।

इन उपायों को करते समय रखें इन बातों का ध्यान

-किसी भी मंगलवार से मंत्रजाप शुरु किया जा सकता है।

-जननाशौच (बच्चे के जन्म का सूतक) और मरणाशौच (मृत्यु के सूतक) में इसका प्रारम्भ नहीं करना चाहिए।

-मंत्रकर्ता को सात्विक आहार ही लेना चाहिए।

-ब्रह्मचर्य पालन, क्रोध नहीं करना और सत्य बोलना एवं सदाचार से हनुमानजी विशेष प्रसन्न होते हैं। यदि ये सद्गुण अपना लिए जाएं तो रोग का नाश शीघ्र हो जाता है।

‘पवन-तनय संतन हितकारी’ हनुमानजी उपमारहित हैं, उनकी कहीं तुलना है ही नहीं। उनके उपकारों का गुणगान करना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है। वे हृदय से चाहते हैं कि प्राणियों के दु:ख दारिद्रय, आधि-व्याधि सदा के लिए मिट जाएं।

टीम बेबाक

Bebak Newshttp://bebaknews.in
Bebak News is a digital media platform. Here, information about the country and abroad is published as well as news on religious and social subjects.

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

114,247FansLike
113FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles