Share
केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे का निधन, PM मोदी ने जताया शोक

केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे का निधन, PM मोदी ने जताया शोक

मध्य प्रदेश

केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अनिल माधव दवे का आज दिल का दौरा पड़ने से 61 साल की उम्र में निधन हो गया। सुबह अचानक तबीयत खराब होने के बाद उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती करवाया गया था। जहां उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। अनिल दवे की निधन पर नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि, कल शाम तक दवे जी मेरे साथ ही थे। उनका जाना ये मेरे लिए निजी क्षति है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, सोनिया गांधी समेत कई नेताओं ने केंद्रीय मंत्री के निधन पर शोक जताया। दवे 2009 से मध्य प्रदेश से राज्यसभा के मेंबर थे। लंबे वक्त से आरएसएस से जुड़े रहे। नर्मदा और पर्यावरण की बेहतरी के लिए उन्होंने काम किया।

पीएम मोदी ने शोक जताते हुए कहा, दोस्त और एक आदर्श साथी के तौर पर अनिल दवे जी के निधन से दुखी हूं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। लोक हित के काम के लिए दवे जी को याद रखा जाएगा। कल शाम ही वो मेरे साथ थे। हमने कुछ पॉलिसी इश्यू पर चर्चा भी की थी। उनका जाना मेरे लिए निजी क्षति है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शोक जताते हुए कहा, ‘केंद्रीय मंत्री अनिल दवे के निधन से दुख पहुंचा। उनके परिवार और शुभचिंतकों के लिए मेरी संवेदनाएं।’ सोनिया गांधी ने कहा, ‘दवेजी के आकस्मिक निधन से धक्का लगा। वह अच्छे वक्ता और जेंटलमैन थे। अपने नम्र स्वभाव के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्हें मेरी श्रद्धांजलि।’

READ  ब्रिटेन: म्यूजिक कंसर्ट के दौरान बम धमाकों से दहला मैनचेस्टर, 19 की मौत

देश ने सच्चा देशभक्त खो दिया
शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘बड़े भाई, घनिष्ठ मित्र अनिल माधव दवे के असामयिक निधन से हैरान हूं। उनके रूप में देश ने सच्चा देश भक्त और मां नर्मदा का सपूत खो दिया।’ प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ”दवेजी एक सच्चे प्रकृति प्रेमी थे। पर्यावरण की रक्षा और विकास के लिए उनके काम को याद रखा जाएगा।’ राजनाथ सिंह ने कहा, ‘कैबिनेट के साथी दवेजी के लिए निधन से गहरा धक्का लगा। वह पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर काफी संवेदनशील और बहुत जुझारू थे। उनके परिवार के लिए मेरी संवेदनाएं।’

अनिल दवे का राजनीतिक करियर?
अनिल दवे का जन्म 6 जुलाई, 1956 को उज्जैन के पास बड़नगर में हुआ। उन्होंने गुजराती कॉलेज, इंदौर से एम.कॉम किया। दवे ने इंदौर के कॉलेज से मास्टर डिग्री ली। यहां वे स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट चुने गए। इसके बाद जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़ गए थे। वे संघ प्रचारक रहे और शादी नहीं की थी। बीजेपी को मध्य प्रदेश की सत्ता में वापस लाने में अनिल दवे का भी अहम योगदान रहा।

READ  केरल में RSS दफ्तर के बाहर बम धमाका, 4 बीजेपी कार्यकर्ता घायल

2009 से अब तक मध्य प्रदेश से राज्यसभा मेंबर थे। मोदी सरकार में जुलाई, 2016 में वन और पर्यावरण राज्य मंत्री बने। दवे की कोशिशों से कुछ दिन पहले सरसो की जीएम फसल को पर्यावरण मंत्रालय ने कारोबारी खेती की मंजूरी दी थी। क्लाइमेट चेंज पर पेरिस समझौते में भारत का पक्ष रखने के लिए दवे ने अहम भूमिका निभाई। दवे पर्यावरण के चिंतक होने के साथ अच्छे लेखक भी थे। उन्होंने पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज के अलावा कई विषयों पर किताबें लिखीं।

टीम बेबाक

SHARE ON :
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •   
(Visited 15 times, 1 visits today)