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उत्तराखंड में बंगाल के 1 ट्रेकर की मौत, खतरनाक ग्लेशियर में फंसे 12 ट्रेकर

उत्तराखंड में बंगाल के 1 ट्रेकर की मौत, खतरनाक ग्लेशियर में फंसे 12 ट्रेकर

उत्तराखंड: बीते 5 जून से उत्तराखंड के पन्पतिया ग्लेशियर में फंसे 12 ट्रैकर्स को बचाने के लिए अब उस टीम को लगाया गया है। जिसने हाल ही में माउंट एवरेस्ट फतह किया है। बंगाल रेलवे के इंजीनियरों का यह दल 5 जून को रुद्रप्रयाग के लामबगड़ से नदी किनारे ट्रैकिंग पर निकला था। जिसके बाद लगभग 16000 फीट की ऊंचाई पर यह दल पहुंच कर फस गया है। उधर राज्य सरकार की तरफ से बंगाल सरकार को पूरे हालातों के बारे में जानकारी दी जा रही है।

चारों तरफ बर्फीले पहाड़ और 16000 की फीट ऊंचाई पर पहुंचने के बाद इस दल के एक सदस्य की मौत हो गई है। जिसके बाद घबराए ट्रैकर्स रास्ता भटक गए हैं दल के साथ गए 12 पोटर्स और दो गाइड भी मौजूद है। जिनमें से 2 लोगों को रुद्रप्रयाग मुख्यालय के लिए पैदल निकाला गया था।

जिन्होंने यह सूचना दी है कि कठिन हालातों और पन्पतिया ग्लेशियर से भी आगे सभी लोग फंसे हुए हैं। सूचना जैसे ही जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग पर पहुंची वैसे ही स्थानीय पुलिस और रेस्क्यू टीम को मौके पर निकाला गया। लेकिन बताया जाता है कि जिस जगह पर यह लोग फंसे हुए हैं।

ट्रेकिंग के लिए बंगला से उत्तराखंड के ग्लेशियर में आए थे

बता दें कि वहां पर पहुंचना ही बेहद कठिन है। लिहाजा एसडीआरएफ संजय गुंज्याल ने देहरादून से तुरंत उस टीम को रवाना किया। जो टीम हाल ही में माउंट एवरेस्ट फतह करके लौटी है। माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली इस टीम पर अब जिम्मा है उन 11 लोगों को सुरक्षित निकालना जो बंगाल से यहां पर ट्रैकिंग के लिए आए थे

संजय गुंज्याल का कहना है कि जैसे ही प्रशासन को इसकी सूचना मिली तुरंत चॉपर के माध्यम से रेस्क्यू टीम को निकाला गया है। लेकिन कठिन हालातों में यह टीम कुछ दूरी तक तो जा सकती है। लेकिन 2 दिनों का सफर रेस्क्यू दल को भी पैदल भी पार करना होगा।

रेस्कयू के लिए पहुंची टीम

जिसके बाद यह टीम फंसे हुए लोगों तक पहुंच पाएगी। फिलहाल इस टीम का संपर्क सुबह जिला प्रशासन से हुआ था। जिन्होंने बताया है कि फिलहाल मौसम साफ है और रेस्क्यू के लिए टीम आगे बढ़ रही है। हालांकि मौसम खराब के कारण कुछ तकनीकी कारणों के कारण रेस्क्यू में दिक्कत हो सकती है लेकिन टीम आगे लगातार बढ़ रही है

राज्य सरकार भी इस मामले में लगातार नजर बनाए हुए है। सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक का कहना है कि हमारे पास प्रयाप्त संसाधन है। लिहाजा सभी को इस रेक्सयू के लिए लगाया गया है। रेस्क्यू दल 2 दिनों में वहां तक पहुंच जाएगा और लगभग डेढ़ दिन नीचे उतरने में सभी को लगेगा उनका कहना है कि यह ग्लेशियर इतना खतरनाक है कि इससे पहले भी यही पर कई लोग फंस चुके हैं।

बीते साल भी हो चुकी है कैजुअल्टी

बीते साल एक कैजुअल्टी भी यहीं पर हुई थी चारों तरफ बर्फबारी की वजह से ट्रेकिंग दल इन को पार करने की कोशिश करते हैं और तभी उनके साथ इस तरह के हादसे होते हैं फिलहाल देहरादून में बैठकर संजय गुंज्याल पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं

टीम बेबाक

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