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यहां पानी पर लगता है धारा-144

यहां पानी पर लगता है धारा-144

महाराष्ट्र, लातूर

जिंदगी पानी की तरह ही बहती जाती है लेकिन पानी जिंदगी नहीं है जिंदगी पानी है। इस मुल्क का एक ऐसा हिस्सा है जहां जिंदगी की कीमत पानी से तय होती है। क्योंकि यहां की धरती प्यासी है, लोग प्यासे हैं, जिंदगी प्यासी है, आसमान सुर्ख है, बादलों का नामो निशां नहीं है। कई सालों से यहां के आसमान ने एक बूंद पानी नहीं गिराया।

अगर पानी की कीमत अगर जिंदगी हो तो लोगों को मंजूर होगी। लातूर, ये हिंदुस्तान का वो हिस्सा है जहां पानी के लिए सरकार धारा 144 लगाती है। जहां पानी के लिए लोग मरने मारने पर उतारु हो जाते हैं।

कुछ ऐसा ही हुआ है इस बार भी जब पानी की किल्लत को देखते हुए सरकार ने पानी की संघर्ष को रोकने के लिए पानी के स्त्रोत के आसपास धारा-144 लागू कर दिया गया है। लातूर शहर स्थित 6 वाटर टैंक्स और शहर को पानी की सप्लाई करने वाले तालाबों, कुओं और अन्य पानी के स्त्रोत के आसपास अधिक लोगों को एक साथ जाने पर पाबंधी लगा दी गई है।

पानी को लेकर हिंसक झड़पों की आशंका को देखते हुए ये कदम जिला प्रशासन ने उठाया है। कुछ स्थानों पर पानी की सप्लाई को लेकर विवाद हिंसक झड़पों तक पहुंच गया था। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से धारा 144 लगा दी।

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प्रशासन ने हालात पर काबू पाने के लिए 18 मार्च से 1 अप्रैल तक धारा 144 लगाई है। इस दौरान हर घर को 200 लीटर पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

लातूर के मेयर के अनुसार कुछ लोग जोर-जबरदस्ती करके खुद को अधिक लाभ पहुंचाना चाहते हैं ऐसे लोगों की वजह से ही जिले में धारा 144 लगाई गई है। इसका मकसद सिर्फ लोगों को बराबर पानी देना है।

आपको बता दें कि इस इलाके में पिछले 2-3 सालों से बारिश नहीं हुई। इस वजह से यहां पानी की भारी किल्लत हो गई है। तालाब, कुएं सब सूख गए हैं। लेकिन प्यास तो प्यास है वो बढ़ती ही जाती है। खाने के बिना तो जिंदगी फिर भी संभव है लेकिन पानी तो जिंदगानी ही इसके बिना तो नहीं रहा जा सकता है।

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