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गुजरात दौरा: मोडासा पहुंचे पीएम मोदी, दो जल परियानाओं का किया उद्घाटन

गुजरात

पीएम मोदी का गुजरात में आज दूसरा दिन मोडासा पहुंच चुके हैं। इस दौरान उन्होंने दो जल परियोजनाओं का उद्घाटन किया। साथ ही अरावली में वाटर सप्लाई स्कीम का भी उद्घाटन किया। पीएम मोदी आदिवासी और युवाओं के बीच जाकर उन्हें संबोधित कर रहे हैं। संबोधन के बाद गांधीनगर के महात्मा मंदिर में अंतर्राष्ट्रीय टेक्सटाइल कांफ्रेंस में हिस्सा भी लेंगे।

मोडासा में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यहां से मेरा पुराना रिश्ता है। उन्होंने जल परियोजना उद्घाटन के बाद कहा कि आज इस शहर के लिए दीवाली जैसा माहौल है। बचपन से लेकर आज तक जितनी भी दीवाली मनाई है सही मायने में उसका जश्न आज मनाने का मौका है।

पीएम मोदी ने कहा कि जब भी बीजेपी को गुजरात की जनता की सेवा करने का मौका मिला है, चाहे वो केशुभाई हो या आंनदी बेन हो, विजय भाई हो या में खुद हुं, आप एक बात देखना बीजेपी ने जितनी सरकार बनायी ओर आपने जितना समय बीजेपी को सेवा करने का मौका दिया हमने कभी ऐसा-वेसा काम नहीं किया, कभी काम में लापरवाही नहीं की।

गुजरात के विकास मॉडल का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि पूरे देश में गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा इसलिये होती है क्योंकि हमारी सरकार ने कभी थोड़े वक्त के राजनीतिक स्वार्थ वाले लोगों की तरह काम नहीं किया, हमने हमेशा लीपापोती वाले काम को छोड़ मजबूती के साथ काम किया है। उन्होंने कहा कि गुजरात का सर्वांगीण विकास करना है तो गुजरात के कोने-कोने में पानी बहाकर ही गुजरात का विकास होगा। और वो सपना हमने देखा है।

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इससे पहले पाटीदारों का गढ़ माने जाने वाले राजकोट में पीएम मोदी ने रोड शो भी किया। भारी बारिश के बावजूद पीएम मोदी के रोड शो में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। उनके रोड शो में लोगों ने फूल की बारिश की। उसके बाद वे एक कार्यक्रम में सम्मिलित हुए जहां उन्होंने कहा कि, ’40 साल बाद कोई पीएम राजकोट आया है। राजकोट की मेरे दिल में खास जगह है। और मुझे प्रधानमंत्री बनाने में राजकोट का विशेष योगदान है। अगर राजकोट ने मुझे चुनकर गांधीनगर नहीं भेजा होता तो देश ने मुझे दिल्ली नहीं पहुंचाया होता। मेरे राजनीति की शुरुआत गुजरात से हुई है।’

उन्होंने आगे कहा कि दिव्यांगों की जिम्मेदारी सिर्फ उनके परिवार की ही नहीं बल्कि पूरे समाज की है। आजादी के 70 साल के बाद भी साइन लैंग्वेज हिंदुस्तान के हर राज्य में अलग-अलग है। दिव्यांग जनों के इस भाषा में भी भेद था। इसलिए पूरे देश में दिव्यांग कहीं जाता था और कुछ समझता था तो उसे समझने के लिए कोई इंटरप्रेटर नहीं था।

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राजकोट के लोगों आभार जताते हुए कहा कि साबरमती आश्रम की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘गौ-भक्ति के नाम पर लोगों की हत्या स्वीकार नहीं की जाएगी। महात्मा गांधी आज होते तो इसके खिलाफ होते।’ उन्होंने गोरक्षकों को महात्मा गांधी और विनोबा भावे के जीवन से सीख लेने की नसीहत भी दी। गोरक्षकों को यह कड़ा संदेश देते हुए पीएम मोदी भावुक भी हो गए। मोदी ने कहा कि विनोबा भावे से बड़ा कोई गोरक्षक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि देश को अहिंसा के रास्ते पर चलना होगा, क्योंकि यही हमारे मूलभूत संस्कार हैं। इंसान को कानून हाथ में लेने का हक नहीं है।

टीम बेबाक

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